आगरा में हुआ धमाका दिल्ली के तर्ज पर ट्रायल तो नहीं?

पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में भी आतंकियों ने रिहर्सल करके एक माह बाद बड़ी साजिश को अंजाम दिया था। जानकारों के मुताबिक जय हॉस्पिटल में जिस बम के जरिए विस्फोट किया गया, उसकी मारक क्षमता कम, लेकिन धमक ज्यादा थी। लिहाजा इसकी चपेट में आने वाले लोग घायल तो हुए पर न तो उस दीवार को नुकसान पहुंचा, जिससे सटाकर बम रखा गया था और न ही अन्य किसी दीवार को। सिर्फ कांच टूटे और कुर्सियों वाली बेंच उछली।
विस्फोट स्थल को लेकर भी आशंकाएं सामने आई हैं। धमाका करने वालों ने विस्फोट के लिए ऐसे हॉस्पिटल को चुना, जो सड़क के किनारे तो था, मगर भीड़भाड़ कम रहती थी। साथ ही ऐसी जगह जाकर कम क्षमता का बम रखा, जहां पहुंचने में कोई ज्यादा मशक्कत भी नहीं करना पड़ी। यदि आतंकी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देना चाहते तो वे बड़ी क्षमता का बम इस्तेमाल करते और उसके लिए किसी व्यस्त बाजार या बड़े अस्पताल को चुनते।












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