रेल हादसों में मौतों पर कब तक ओढ़ाते रहेंगे मुआवजों का कफन

Railways is just meant for compensation in train accidents
चेन्‍नई। कालका मेल ने रेलवे ट्रैक पर मौत का जो खेल खेला, उसका खौफ अभी लोगों के दिलों से निकला भी नहीं था कि मंगलवार की रात रेल हादसे की एक और वारदात ने ट्रैक पर 9 लोगों की कब्र बना दी। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्‍य में मंगलवार की रात दो ट्रेनों की टक्‍कर हो गई, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई व लगभग 100 लोग घायल हो गये। यह दुर्घटना तब हुई जब अरक्‍कोनम से कटपडी जा रही पैसेंजर ट्रेन सिग्‍नल के हरे होने का इंतजार कर रही थी, उसी वक्‍त रेड सिग्‍नल को तोड़कर एक लोकल ट्रेन ने उसे टक्‍कर मार दी। इस दुर्घटना में ट्रेन के तीन डिब्‍बे पटरी से उतर गये।

अफरा-तफरी के माहौल में बचाव कार्य शुरु किया गया मगर खराब रौशनी और तेज बारिश ने उसमें भी बाधा डाली। आनन-फानन में रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने मुआवजे की घोषणा कर दी। मगर इन सबके बावजूद एक जवाब पीछे रह गया। अब आप सोच रहे होंगे कि कौन सा जबाब? तो आपको बताते चलें कि जवाब यही है कि आखिर सवाल क्‍या है? सवाल यह है कि आखिर कब तक रेलवे ट्रैक कब्रगाह में तब्‍दील होते रहेंगे? आखिर कब तक रेल प्रशासन यूं ही हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा और आखिर कब तक ट्रैक पर हुई मौतों पर मुआवजे का कफन ओढ़ाया जायेगा?

आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि कालका मेल हादसे में 60 लोगों की जान गई थी और 150 से अधिक लोग जख्‍मी हो गये थे। चेन्‍नई में हुए रेल हादसे की वजह तलाशें तो प्रथम दृष्टिया मानवीय भूल सामने आ रही है। मगर कहीं न कहीं रेल प्रशासन भी इस गलती में बराबर का हिस्‍सेदार है। या फिर सीधे शब्‍दों में कहें तो बेकसूर लोगों के खून के छीटें रेलवे प्रशासन पर भी पड़ी हैं। यह तो रही मानवीय गलती और रेलवे प्रशासन की उदा‍सीनता मगर आकड़ों पर नजर डालें तो साफ जाहिर है कि हमेशा से ऐसी गलतियां होती आईं हैं और रेल प्रशासन जांच और मुआवजे की घोषणा के अलावा कुछ न‍ही कर सका है।

पहले हुए रेल हादसों पर एक नजर

3 दिसंबर 2000- पंजाब में सराय बंजारा और साधुगढ़ स्टेशन के बीच पटरी से उतरी मालगाड़ी से हावड़ा-अमृतसर मेल टकराई, 46 की मौत और 130 से ज्यादा घायल।

22 जून 2001- केरल में कोझिकोड के निकट मेंगलूर-चेन्नई मेल कडालुंडी नदी में गिरी, 40 की मौत और 24 घायल

5 जनवरी 2002- महाराष्ट्र में घटनानंडुर स्टेशन पर खड़ी एक माल गाड़ी से सिकंदराबाद-मनमाड एक्सप्रेस जा भिड़ी, 21 की मौत और 41 घायल

9 सितंबर 2002- बिहार के औरंगाबाद जिले में हावड़ा-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की एक बोगी धावे नदी में गिरी, 100 की मौत और 150 घायल

10 सितंबर 2002- बिहार में एक पुल के ऊपर से गुजर रही कोलकाता-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस पटरी से उतरी, 120 की मौत और इतने ही घायल

4 फरवरी 2005- नागपुर में शादी समारोह से लौट रहे ट्रैक्‍टर को तेज रफ्तार रेलगाड़ी ने टक्‍कर मार दी थी। इस हादसे में 52 लोगों की मौत हो गई थी। खास बात यह है कि यह हादसा मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुआ था।

1 दिसम्‍बर 2006- बिहार के भागलपुर जिले में 150 वर्ष पुराने एक पुल का हिस्‍सा गिर गया जिससे पुल के उपर से जा रही रेलगाड़ी हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में 35 से ज्‍यादा लोगों की मौत हुई थी जबकि 20 से ज्‍यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गये थे।

16 अप्रैल 2006-
तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में थिरुमतपुर के पास मानवरहित क्रासिंग पर हुए हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी।

23 फरवरी 2009-
उड़ीसा के धांगीरा इलाके में एक वैन और रेलगाड़ी की टक्कर होने से 14 लोगों की मौत हो गई। सभी एक शादी समारोह से लौट रहे थे। और मानवरहित क्रासिंग पर वैन अचानक खराब होकर बंद हो गई थी।

14 नवम्‍बर 2009- जयपुर से दिल्‍ली जा रही मांडूरी एक्‍सप्रेस के पटरी से उतर जाने से 7 लोगों की मौत हो गई थी।

21 अक्टूबर 2009-
उत्तर प्रदेश के बंजाना में गोवा एक्सप्रेस और मेवाड़ एक्सप्रेस के बीच टक्कर हो जाने से उसमें सवार कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई।

9 मार्च 2010- उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में उटारीपुरा के निकट एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और रेलगाड़ी के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई।

19 जुलाई 2010- पश्चिम बंगाल के सैथिया में वनांचल एक्सप्रेस और उत्तरबंग एक्सप्रेस के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई।

3 जून 2010- तमिलनाडु में एक मिनी बस और रेलगाड़ी के बीच टक्कर हो जाने से 5 लोगों की मौत हो गई।

20 सितम्बर 2010- एक रेलगाड़ी और एक मालगाड़ी के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई और 53 घायल हो गए। यह हादसा मध्य प्रदेश के भदरवाह रेलवे स्टेशन पर हुआ था।

22 मई 2010-
बिहार के मधुबनी जिले में एक मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर हुए रेल हादसे में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई।

29 जनवरी 2011- कानपुर के भोगनीपुर तहसील में एक मानवरहित रेलवे क्रासिंग के पास जनसाधारण एक्सप्रेस ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को टक्कर मार दी जिससे 2 लोगों की मौत हो गई।

6 जुलाई 2011- उत्‍तर प्रदेश के कांशीराम नगर जिले में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर तेज रफ्तार ट्रेन ने बारत से लौट रही बस को टक्‍कर मार दी जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई और लगभग 50 से ज्‍यादा लोग गंभीर रूप से जख्‍मी हो गये।

यह महज चंद घटनाएं हैं जो यह बताने के लिये काफी है कि पूर्व की वारदातों के बाद भी रेल प्रशासन ने इस दिशा में कोई कारगर कदम उठाया है। इस दिशा में अगर कुछ हुआ तो वह यह है कि मुआवजे की रकम बढ़ी हैं और पीडि़तों के परिजनों पर मरहम लगाने की कोशिश की गई है। आपका इस संबंध में क्‍या कहना है? हमें जरुर बताईएगा। आप अपनी बात हमतक पहुंचाने के लिये नीचे दिये गये कमेंट बाक्‍स में लिखें। हमें इंतजार रहेगा।

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