गुडग़ांव में गिराई गई अवैध कॉलोनियां

इस कार्य के लिए गुडग़ांव के नायब तहसीलदार विजय यादव को ड्यूटी मैजिस्टे्रट लगाया गया था। यह पहला मौका है कि जब गुडग़ांव जिला प्रशासन ने गांव गढी हरसरू, साढराणा, हरसरू, कादीपुर, बसई, गाड़ौली खुर्द आदि में अवैध रूप से विकसित की जा रही कालोनियों के खेवट नम्बर, कीला नम्बर तथा रकबे की पहचान करके सूची जिला नगर योजनाकार को सौंपी है। उपायुक्त ने कहा कि किसी भी सूरत में जिला में नई अवैध कालोनियों को नहीं पनपने दिया जायेगा और जहां भी इस प्रकार की कालोनियां बनती नजर आयेंगी उनमें निर्माणों को गिरा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि अवैध कालोनियों के प्रति जिला में पूरी निगरानी रखी जा रही है और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए टीमों का गठन भी किया गया है।
नई अवैध कालोनियों की सूची जारी
नई अवैध कालोनियों का उल्लेख करते हुए मीणा ने बताया कि गांव गढी हरसरू में खेवट नं0 351, 352, 1, 172, 394, 345, 346, 347, 349, 396, 304, 305, 306, 361, 362, 88, 379, 297, 174, 377, 411, 189-190, 374, 153, 339, 298, 355-356, 348-340, 45-33-350, 160, 336, 50, 206, 143, 357-358, 341-342-302-392, 412 में अवैध कालोनी काटे जाने की पहचान की गई है। इसी प्रकार गांव साढराणा में खेवट नं0 198, 297, 173, 520, 219, 533, 544, 206, 536, 583, 556, 279, 614, 531-229-565, 7-536-220 में अवैध कालोनी विकसित होती पाई गई हैं। गांव हरसरू में खेवट नं0 250, 254-255, 400-401, 495 में अवैध रूप से कालोनी काटी जा रही हैं।
गांव कादीपुर में खेवट नं0 581 तथा 753, गांव बसई में खेवट नम्बर 252, 53, 50 तथा 38 और गांव गाड़ौली खुर्द में खेवट नम्बर 80, 170 तथा 176 में अवैध रूप से कालोनी काटी जानी पाई गई हैं। उपायुक्त ने इन 6 गांवों की खेवट नम्बर तथा किला नम्बर की सूची जिला नगर योजनाकार को देते हुए उन्हें अवैध कालोनियों पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
प्लाट खरीदते समय रखें विशेष ध्यान
उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि वे प्लाट या फ्लैट खरीदते समय यह जरूर देख लें कि उक्त कालोनी या गु्रप हाऊसिंग सोसायटी नियमित है और उसके पास सरकार का वैद्य लाईसैंस है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति सरकार से लाईसैंस प्राप्त किये बगैर कालोनी नहीं काट सकता क्योंकि अवैध रूप से बनने वाली कालोनियों में पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाईट, सड़कों आदि जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं होती और कालोनाईजर पैसे बना कर चम्पत हो जाता है। ऐसे में प्लाट खरीदने वाले लोगों पर मार पड़ती है और उनकी जीवनभर की गाढी कमाई व्यर्थ चली जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की अवैध कालोनियों में जिला प्रशासन द्वारा प्लाटों की रजिस्ट्री पर भी रोक लगाई हुई है और जिला की किसी भी तहसील में अवैध कालोनियों के प्लाटों की रजिस्ट्री नहीं की जा रही इसलिए किसी भी कालोनाईजर के बहकावे में ना आयें। उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से वैद्य कालोनी विकसित करने के लिए कालोनाईजर को सरकार से सीएलयू तथा लाईसैंस लेना होता है जिसमें मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के बारे में कुछ शर्ते भी सरकार द्वारा लगाई जाती हैं।












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