यूपी विधानसभा चुनाव में यात्राओं का दौर

भारतीय जनता पार्टी के लिए यात्राएं करना नया नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृण्ण आडवाणी कई रथयात्राएं कर चुके हैं, लेकिन इस चुनाव में भाजपा की यह यात्रा कई मायने में अलग है। भाजपा की इन यात्रओं का मुख्य मकसद जनता में पैठ बनाना है। लम्बे समय से प्रदेश की सत्ता से बेदखल भाजपा अब किसी भी कीमत पर उसे पाना चाहती है।
आगामी दशहरा से शुरू होने वाली भाजपा की यह यात्रा दिपावली तक चलेगी। 6 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने के साथ लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों तक यात्रा निकलेगी। यह यात्रा इस मायने में भी नयी है कि पहले जहां भाजपा की यात्राएं राम के सहारे थी वहीं अब वह कृण्ण के भरोसे होंगी।
भाजपा नेताओं ने तय किया है कि वह अपनी यात्रा मथुरा से शुरू करेगें। मथुरा के साथ ही वाराणसी को भी शमिल किया गया लेकिन रामनगरी अयोध्या को सिर्फ एक पड़ाव तक ही रखा गया है। यात्रा का समापन लखनऊ में एक बड़ी रैली के रूप में होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक यात्रा दो चरणों में होगी।
पहले चरण में दशहरा बाद 13 से 22 अक्टूबर और दूसरे चरण में दीवाली बाद 13 नवम्बर से 21 नवम्बर तक। इस दौरान प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में उपयात्राएं निकाली जायेंगी। वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी सत्ता तक पहुंचने के लिए यात्राओं को बेहतर तरीका माना है। सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा 12 सितम्बर से क्रांति रथ यात्रा शुरू करेगी।
पहले चरण में क्रांति रथयात्रा 12 से 14 सितम्बर तथा दूसरे चरण में 19 से 24 सितम्बर तक चलेगी। सपा का भी रथ यात्रा इतिहास पुराना है। वर्ष 1987 में सपा मुखिया मुलायम सिंह रथयात्रा कर चुके हैं। भाजपा व सपा ने पहले भी यात्राएं की है। फर्क अब इतना है कि पहले जहां यात्राओं के जरिए अपनी उपलब्धियां गिनायी थी वहीं अब खोये जनाधार को पाने के लिए यात्राओं का सहारा लिया जा रहा है।












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