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वकीलों-लेखपालों के बीच दिनदहाड़े गैंगवार, अंधाधूंध फायरिंग में 2 की मौत

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Uttar Pradesh: Two lawyers killed in clash with lekhpals in Lakhimpur Kheri
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में शनिवार को गैंग वार का एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे जिले को सन्‍न कर दिया। जिले के मोहम्‍मदी तहसील में वकीलों और लेखपालों के बीच पिछले 5 दिनों से चल रहा मामूली विवाद खूनी संघर्ष में तब्‍दील हो गया। तहसील लेखपालों की तरफ से की गई अंधाधूंध फायरिंग में दो वकीलों की मौत हो गई और पांच अन्‍य लोग घायल हो गये। दो साथी वकीलों की मौत के बाद गुस्‍साए वकील ने जमकर हंगामा काटा और सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ की। इतना ही नहीं वकीलों की फौज सड़क पर उतर आई और दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मोहम्‍मदी में वकील श्‍यामबाबू मिश्रा व लेखपाल कृष्‍ण अवस्‍थी के बीच पांच दिन पूर्व आय प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर विवाद हो गया था। लेखपाल पर घूस मांगने का आरोप लगाकर वकीलों ने उसे पीट दिया था। विवाद जब बढ़ी तो दोनों तरफ से थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया। सूत्रों ने बताया कि शनिवार को मोहम्‍मदी तहसील में लेखपाल बैठक कर रहे थे कि इसी दौरान वहां से गुजर रहे वकीलों से कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने लगा तो लेखपालों ने फायरिंग कर दी जिसमें वकील प्रदीप दीक्षित और मुकुल तिवारी की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पांच अन्‍य जख्‍मी हो गये।

दो वकीलों की मौत की खबर सुनकर तहसील सहित पूरे जिले में आक्रोश फैल गया। बात अगर मोहम्‍मदी की करें तो माहौल कर्फ्यू जैसा हो गया। इलाका पुलिस छावनी में तब्‍दील हो गया। फायरिंग की गूंज प्रदेश की राजधानी तक पहुंची और प्रदेश पुलिस मुखिया आरके तिवारी को भी मौके पर जाना पड़ा। घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिये गये हैं। पुलिस के अनुसार इस घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार जब्त कर लिए गए हैं और लगभग 35 लेखपालों को हिरासत में लिया गया है। घटना के बाद से पूरे जिले में सुरक्षा व्‍यवस्‍था कड़ी कर दी गई है। आला अधिकारियों की मानें तो हिंसा की किसी नई घटना को रोकने के लिए प्रांतीय सशस्त्र आरक्षी दल एवं विभिन्न थानों के अतिरिक्त पुलिस बलों को तैनात किया गया है।

काश! वक्‍त रहते आग को ठंडा करने की कोशिश हुई तो नहीं होती हिंसा

मोहम्मदी गोली कांड से पूरा जिला प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। 29 अगस्त से शुरू हुआ लेखपाल-वकील विवाद लगातार बढ़ता गया पर न ही इस मामले पर स्थानीय पुलिस ही चेती और न जिले के आला अधिकारी। यही नहीं दोनों पक्षों के संगठन के सामने आ जाने के बाद से मानों स्थानीय पुलिस प्रशासन ने हथियार ही डाल दिए थे। यही वजह रही कि तहसील परिसर में सरेआम गोलियों से दो वकीलों को भून दिया गया औव वहां की सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं बौनी साबित हो गई।

लेखपाल-वकील विवाद 29 अगस्त को शुरू हुआ था। घटना के दूसरे दिन से ही मामला तूल पकड़ने लगा था। लेखपाल, वकीलों की तो वकील लेखपालों की गलती बताकर एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई व रिपोर्ट की मांग भी करने लगे। वकीलों का दबाव बना तो पुलिस ने लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। लेखपालों ने जब दबाव बनाया तो पुलिस ने उनकी तहरीर पर भी वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पर दोनों के संगठनों के सामने आ जाने के कारण पुलिस ने हथियार डाल दिए। ऐसे में यह सवाल उठता है कि वक्‍त रहते पुलिस और प्रशासन चेत जाती तो शायद इस हिंसा को रोका जा सकता था।

दिन भर जिले में गूंजता रहा सायरन

मोहम्मदी गोलीकांड मामले में सायं प्रमुख सचिव गृह फतेबहादुर सिंह तथा एडीजी सुवेश कुमार सिंह भी देर सायं घटना स्थल पहुंच गए। दोनों अधिकारियों ने तहसील में लेखपाल सभा कक्ष पहुंचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पूरी घटना की मजिस्ट्रेटी जांच की जा रही है। लेखपालों को हिरासत में लिया गया है।

उन्होंने गोली चलने की घटना को निंदनीय बताया। श्री सिंह ने बताया कि एक लेखपाल के पास से एक राइफल भी बरामद की गई है। इस मौके पर जिलाधिकारी हृषिकेश भाष्कर यशोद तथा पुलिस अधीक्षक अमित चंद्रा, एडिशनल एसपी राजीव मेहरोत्रा, सीओ आरएस गौतम सहित भारी मात्रा में पुलिस एवं पीएससी बल मौजूद रहा।

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English summary
Two lawyers were shot dead and three others critically wounded in a clash with lekhpals in Mohammadi tehsil of Lakhimpur Kheri district of Uttar Pradesh on Saturday afternoon. The incident brought the entire district to a halt as agitated lawyers damaged over 20 vehicles, thrashed the locals and ransacked the office of the district magistrate.
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