गुप्‍त कोडिंग के माध्‍यम से ड्रग्‍स की सप्‍लाई

सिरसा। पंजाब, राजस्थान तथा हरियाणा की सीमा पर स्थित सिरसा आजकल नशेडिय़ों के लिए हमेशा से स्वर्ग बना रहा है। नशा माफिया अब नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए हाईटेक टेक्‍नोलॉजी का इस्तेमाल करने लगे हैं। नशा माफिया के गिरोह में महिलाएं तथा स्कूली बच्चे भी भागीदारी निभा रहे है। नशेडिय़ों ने आधुनिक संचार साधन (मोबाइल) की तर्ज पर गुप्त कोड वर्ड तैयार कर लिए है।

'मिस कॉल' और 'मोबाईल डैड' के संवाद हो रहे यूज

एक चूरापोस्त का सेवन करने वाला नशेड़ी दूसरे नशेड़ी से पूछता है कि मोबाईल रिचार्ज करवाना था, कहां से होगा, जिस पर दूसरा नशेड़ी इस तरह जवाब देता है कि अमुक चौपाल पर आज मोबाईल कार्ड बांटे जाएंगे, यानि उक्त चौपाल पर नशा मिलेगा। इसी प्रकार एक नशेड़ी को यदि लगे कि दूसरे नशेड़ी का नशा टूट गया है, तो वह उससे कहेगा कि लगता है, तेरा मोबाईल रेंज नहीं पकड़ रहा, तो इस पर उसका उत्तर होगा कि आज सिर्फ 'मिस कॉल' ही दी जा सकती है, यानि नशा कम किया हुआ है।

नशा न मिलने पर 'मोबाईल डैड' कहा जाता है। नशा बेचने वाला यदि पुलिस भय से अपना स्थान बदल ले, तो वह नशेडियों को सूचना इस प्रकार देगा कि टावर अब अमूक स्थान पर लगेगा और कल से काम शुरू हो जाएगा। कोई नशेड़ी शराब, अफीम, चूरापोस्त छोड़कर नशे की गोलियां खाना शुरू कर देता है, तो वह मोबाईल का पहले कनैक्शन कटवा देने तथा दो सिम वाला नया मोबाईल लेने की बात कहता है।

बीड़ी-सिगरेट है फायर तो महंगा कार्ड है स्मैक

इसी प्रकार बीड़ी-सिगरेट सेवन को नशेड़ी फायर करना कहते है। स्मैक एक महंगा सौदा है, मगर सेवन करने वाले इसे महंगा कार्ड बताते है, क्योंकि इस नशे का आदी दो ग्राम का सेवन प्रतिदिन करता है। ऐसा नशेड़ी नशे में झूमता हुआ दूसरे नशेड़ी से कहता है कि बड़ा महंगा कार्ड हो गया है और तीन हजार रूपये खर्च करके मोबाइल रिचार्ज करवाया है।

कई बार महंगा नशा खरीदने की स्थिति में नशेड़ी अपनी असमर्थता का प्रगटवा यह कह कर करता है कि टॉवर तो कंपनियों ने बहुत लगा दिए है, पर कुनैक्शन महंगा है। उल्लेखनीय है कि स्मैक पान के पत्ते में रख कर देते हुए इसे एम पी पत्ता कहा जाता है। इसी प्रकार नशीली दवाईयां बेचने वालों ने भी कोड वर्ड रखे हुए है। कुछ दवा विक्रेता स्वास्थय विभाग या पुलिसिया तंत्र के भय से होम डिलवरी तक दी जाती है।

ज्यादातर नशेड़ी मोबाईल द्वारा ही अपने आर्डर बुक करवा देते है। कोरेक्स को कोक, कैप्सूल को काजू, नशीली दवाईयों को लाल घोड़ा, नीला घोड़ा इत्यादि कोड वर्ड के माध्यम से नशे के व्यापारी होम डिलवरी करते है। नये ग्राहकों को इस का आदी बनाने के लिए बहु कंपनियों की तरह दस शीशी के साथ एक, लोमोटिल के 20 पत्तों पर एक पत्ता मुफ्त जैसी योजनाएं के चलते नशेड़ी इकठ्ठे होकर गिफ्ट योजना का लाभ उठाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में नीम-हकीम व झोला छाप चिकित्सक भी नशे के व्यापारी की चपेट में आकर नशीले पदार्थों की बिक्री को बढ़ावा दे रहे है।

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