अन्ना के 'अर्जुन' केजरीवाल ने कहा, मैंने नहीं सरकार ने किया है फर्जीवाड़ा
आयकर विभाग की ओर से भेजे गये नोटिस पर केजरीवाल ने कहा कि ये आयकर विभाग ने नहीं बल्कि सरकार का भेजा हुआ नोटिस है। उन्होंने स्टडी लीव ली थी। जिसके के लिए उन्होंने एक बांड साइन किया था। उसके बाद आपको पूरी सैलरी मिलती है लेकिन उन्होने एक पैसा नहीं लिया क्योंकि वो एलओपी पर थे।
नियमों के मुताबिक अगर मैं वापस नौकरी ज्वाइन नहीं कर पाता, या इस्तीफा दे देता हूं, या फिर नौकरी छोड़ देता हूं तो उस दशा में दो साल तक जो मैंने तनख्वाह ली थी वो वापस कर दी जाएगी। मैं एक नवंबर-2000 से 31 अक्टूबर-2002 तक स्टडी लीव पर था। 1 नवंबर 2002 को नौकरी ज्वाइन कर ली थी और तीन साल बाद फरवरी 2006 में इस्तीफा दिया। यानि साढ़े तीन साल से ज्यादा वक्त बाद मैंने इस्तीफा दिया, यानि बॉन्ड की कोई शर्त नहीं तोड़ी है।
केजरीवाल ने कहा कि अगर आयकर विभाग को उनसे शिकायत थी तो साल 2006 के बाद से ही उनके पास नोटिस आना चाहिए था लेकिन आया नोटिस तब जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ है। जिससे साफ-साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार की मंशा क्या है। केजरीवाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि विभाग ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है अगर वो अगले साल अर्ली रिटायरमेंट ले लेते हैं। तो सरकार उनको पैसे देगी ना कि वो सरकार का। केजरीवाल के साथ प्रशांत भूषण भी मौजूद थे उन्होंने भी केजरीवाल की सारी बातों को कानूनन सही बताया।
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल को आयकर विभाग ने नोटिस भेजकर बकाया 9 लाख रुपए चुकाने को कहा है। विभाग के मुताबिक वे दो साल तक स्टडी लीव पर रहकर सैलरी लेते रहे। जिसे उन्हें ब्याज सहित चुकाना पड़ेगा।













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