कैश फार वोट मामले में प्रधानमंत्री के खिलाफ याचिका खारिज
नई
दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बार फिर बेवजह याचिका दाखिल करने वाले पर नकेल कसा है। कोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले पर एक लाख का जुर्माना ठोका है। कोर्ट ने इस बात की नसीहत दी है कि किसी के खिलाफ याचिका दाखिल करने से पहले उसे जांच परख ली जाए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2008 में विश्वास प्रस्ताव के दौरान कैश फार वोट मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। id="toptextpromo">न्यायालय
ने याचिकाकर्ता के वकील पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंका है। याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश अजित भरिहोक ने कहा कि पेश याचिका को देखने से जान पड़ता है कि इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के इरादे से दाखिल किया गया है। इसलिए मेरे विचार से याचिका कानून की प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने के सिवाय कुछ और नहीं है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता संतोष कुमार सुमन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट उच्च न्यायालय के महापंजीयक के पास जुर्माने की राशि जमा करे। इसके बाद यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष को अग्रसारित की जाएगी। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>याचिकाकर्ता
ने दलील दी कि चूंकि सांसदों को पैसे कथित रूप से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को बचाने के लिए दिए गए थे और पैसे की पेशकश में प्रधानमंत्री की मिलीभगत जाहिर होती है इसलिए उनके खिलाफ मामला दायर होना चाहिए। आपको बता दें कि 22 जुलाई 2008 को भाजपा के तीन सांसदों ने विश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले लोकसभा में नोटों की गड्डियां लहराई थीं। सदस्यों ने आरोप लगाया था कि उन्हें यह पैसा मनमोहन सिंह सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए दिया गया।











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