अन्‍ना की मांगे संसद तय करे: सरकार

Parliament should decide Anna Hazare's Janlokpal Bill: Govt
दिल्‍ली। यूपीए सरकार लोकपाल बिल से अब अपना पल्‍ला झाड़ती हुई नजर आ रही है। वित्‍तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज संसद में लोकपाल बिल पर अपना बयान देते हुए कहा कि अन्‍ना हजारे की मांगों को तय करना संसद की जिम्‍मेदारी है। अन्‍ना हजारे के जनलोकपाल बिल पर बहस होनी चाहिए या नहीं यह तय करना संसद की जिम्‍मेदारी है। इस प्रक्रिया में सरकार की जो भूमिका होगी वह उसे निभाएगी।

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अन्‍ना हजारे ने लोकपाल बिल में जो अपनी शर्तें रखी हैं सरकार इस पर बहस की भी बात कह चुकी है। लेकिन इस बात पर मुहर सदन की मंजूरी के बाद ही लग सकती है। उन्‍होंने कहा कि जनलोकपाल बिल में कई ऐसी मांगे हैं जिनको लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने की जरूरत पड़ेगी। अब यह सबको मिलकर तय करना है कि इस लोकपाल बिल को लागू करने के लिए संविधान में क्‍या-क्‍या बदलाव किए जा सकते हैं।

अन्‍ना हजारे के अनशन को आज 12 दिन हो गए हैं। सरकार ने अन्‍ना हजारे का अनशन तुड़वाने की कई कोशिशें की हैं। लेकिन अंत में आकर अन्‍ना अपनी 3 शर्तों पर अड़ गए हैं। जब सरकार अन्‍ना हजारे के अनशन को तुड़वाने में कामयाब नहीं रही है तो उसने गेंद संसद के पाल में डाल दी है। सरकार चाहती है कि अगर अन्‍ना हजारे का जनलोकपाल बिल सदन में अटके तो इसके लिए सभी पार्टियों की जिम्‍मेदारी हो।

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