लोकपाल पर अन्ना जीत से तीन कदम दूर
टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने देर शाम सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से वार्ता की। ढाई घंटे तक चली इस वार्ता का सबसे बड़ा और अहम बिंदु यह था कि अब सरकार को पीएम को लोकपाल के दायरे में लाने में ऐतराज नहीं है, हालांकि अभी भी सरकार की ओर से खुल कर सहमति व्यक्त नहीं की गई है। यानी सरकार कभी भी पीएम मामले में पीछे हट सकती है।
अब बात करते हैं उन मुद्दों की जिस पर मतभेद अभी भी बरकरार है। निचले स्तर की न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाना, दूसरा सभी राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति और तीसरा सिटिजन चार्टर लागू करना। यानी निचले स्तर की अदालतों के जजों को लोकपाल के दायरे में सरकार नहीं रखना चाहती है। हालांकि सरकार ने इस पर अलग से कानून लाने की बात पर विचार करने की बात कही है।
लोकायुक्त की नियुक्ति पर सरकार इसलिए पीछे हट रही है, क्योंकि इसके अंतर्गत हर सरकारी कर्मचारी उसके दायरे में आ जायेगा। सिटिजन चार्टर के अंतर्गत भ्रष्टाचार का केस दाखिल होने पर यदि उसकी जांच दी गई समय सीमा में पूरी नहीं होती तो जिम्मेदार अधिकारी के वेतन में कटौती की जाएगी।
अरविंद केजरीवाल के मुताबिक सरकार ने बुधधवार तक का समय मांगा है। उन्होंने बताया कि जब तक सभी शर्तें मान नहीं ली जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।













Click it and Unblock the Notifications