दलितों का बहुजन लोकपाल बना पाचवां लोकपाल बिल

Dalits to launch own version of the Lokpal Bill
नई दिल्ली। पहले सरकारी लोकपाल, उसके बाद अन्ना का जनलोकपाल, फिर अरुणा राय का लोकपाल और इसके बाद कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और सांसद संदीप दीक्षित चौथा लोकपाल बिल तैयार कर रहे हैं। इसी बीच अब बहुजन लोकपाल अस्तित्व में आ चुका है जो कुल मिलाकर पाचवां लोकपाल बिल होगा। इसे पेश किया दलित नेता उदित राज ने।

डा. उदित राज ने कहा कि अन्ना के आंदोलन का मुद्दा सही है पर तरीका ठीक नहीं है। अन्ना हजारे के सभी साथी सवर्ण समुदाय के हैं। इस टीम में कोई भी दलित जाति का नहीं है इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसे सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बिल को स्वीकार करने का मतलब है कि अंबेडकर के बनाए हुए संविधान को खत्म करना या कमजोर करना। हम ऐसा होने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा इस आंदोलन में दलित, मुस्लिम और बैकवर्ड समुदाय को शामिल करना चाहिए था। पर ऐसा नहीं किया गया इसमें सिर्फ मध्यम वर्ग के कुछ युवा लोग हैं। उदितराज ने कहा सरकार की ओर से पेश लोकपाल विधेयक काफी कमजोर है जबकि अन्ना हजारे का जन लोकपाल पूरी तरह से अव्यावहारिक है। इसीलिए आज इंडिया गेट पर हमलोग इसके विरोध में रैली करने जा रहे हैं जिसमें बहुजन लोकपाल विधेयक पेश किया जाएगा। इसमें समाज के सभी वर्गों के लोगों का प्रतिनिधित्व होगा। बहुजन लोकपाल का प्रस्ताव संसद की स्थायी समिति को विचार के लिए भेजा जाएगा।

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