सरकार की मंशा साफ नहीं, मर भी गया तो परवाह नहीं : अन्ना हजारे
वो कहती है कि लोकपाल के दायरे में केवल सीनियर आफिसर्स ही होने चाहिए जबकि आम जनता तो रोज जूनियर कर्मचारियों से दो चार होती है जो केवल जनता का खून चूसती है। इसलिए जूनियर कर्मचारियों का होना लोकपाल में बहुत जरूरी है। अन्ना ने कहा कि आज घर में एक बच्चा पैदा होता है तो उसके ऊपर हजारों के कर्ज का बोझ होता है जिसे चुकाने के लिए उसकी पूरी जिंदगी बीत जाती है लेकिन कर्ज खत्म नहीं होता है।
अन्ना ने कहा कि ये भ्रष्ट लोगों की देन हैं, इसलिए अन्ना चाहता है कि जनलोकपाल हर हालत में बनना चाहिए। अन्ना ने कहा कि जब तक सरकार उनकी बात नहीं मानती है तब तक उनका अनशन नहीं टूटेगा, चाहे इसके लिए उनकी जान चली जाये, उन्हें परवाह नहीं है। अन्ना ने कहा कि अगर उनका जीवन गरीबों के लिए खत्म भी हो जाता है तो ये उनका सौभाग्य होगा। डॉक्टरों के मना करने के बाद भी अन्ना ने आज बीस मिनट तक समर्थकों को संबोधित किया।













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