राज्यसभा में जस्टिस सौमित्र पर महाभियोग चलाने की मंजूरी

राज्यसभा की मंजूरी के बाद अब अगर लोकसभा के सांसद भी इस पर अपनी मुहर लगा देते हैं तो सौमित्र सेन अभियोग द्वारा हटाए जाने वाले पहले न्यायाधीक्ष होंगे। इससे पहले 1993 में सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाशीक्ष के खिलाफ महाभियोग चलाया गया था। लेकिन सत्ता पक्ष की अनुपस्थिति के कारण तब उसे हटाया नहीं जा सका था। इस बार पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सौमित्र सेन को हटाने की मंजूरी दी।
हमारे लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ को ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है वहां भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। अभी न्यायाधीक्ष पीडी दिनाकरण के खिलाफ भी महाभियोग चलाया जाना था लेकिन उन्होंने इससे पहले ही अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मामले सामने आने से सिविल सोसाइटी की उस मांग को बल मिला है जिसमें वे न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं।












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