हिंदू परिवार में पल रहे अकबर को पाने के लिए मां कोर्ट में

करेगी?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीके जैन और जस्टिस एचएल दत्तू की बेंच ने बच्चे की परवरिश करने वाले पर अपहरण का आरोप लगाने पर शहनाज को जमकर फटकारा। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिस परिवार ने बच्चे के नाम और धर्म में कोई परिवर्तन न कर उसे बेटे की तरह रखा उस पर यह आरोप उचित नहीं है। बेंच ने शहनाज से पूछा कि वह इस बच्चे की जिम्मेदारी कैसे उठाएगी जबकि अब वह विधवा है तथा उसके दो और बेटे हैं जो अकबर से छोटे हैं।
साल 2004 में बेटे के लापता होने के तीन साल बाद शहनाज को जब पता चला कि उसका बेटा लखनऊ के कैसरबाग में एकूलाल नामक व्यक्ति के घर पर है तो अपने पति के साथ वहां पहुंची और बेटा वापस मांगने लगी, लेकिन बच्चे ने मां के साथ जाने से साफ मना कर दिया। इसके बाद एकूलाल ने भी उसे बच्चा नहीं दिया। इस पर शहनाज लखनऊ के कोतवाली थाने गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि बच्चे के खोने के बाद कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।
इसके बाद शहनाज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिसे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बच्चे की मर्जी के खिलाफ वह उसे नहीं रख सकती। मां और बेटे की यह कहानी बेहद अजब और मार्मिक भी है। इलाहाबाद की रहने वाली महिला शहनाज बेगम का छह साल का बच्चा अकबर 2004 में खो गया था। उस वक्त वह अपने पिता मोहम्मद अब्बास के साथ पार्क में गया था।
शहनाज और अब्बास ने गुमशुदा बेटे को बहुत तलाशा, मगर कुछ पता न चला। इस घटना के तीन साल बाद जुलाई 2007 में एक टीवी चैनल में खोए हुए बच्चों पर बने कार्यक्रम के जरिए शहनाज को बेटे के बारे में पता चला कि वह लखनऊ में एकूलाल नामक एक चाय वाले के पास पल रहा है। दरअसल लापता हो जाने के बाद अकबर एकूलाल को मिला। एकूलाल ने पहले तो उसके माता-पिता का पता लगाने की कोशिश मगर कोई जानकारी न मिलने के बाद वह बेटे की तरह उसे पालने लगा।












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