महंगाई पर राजनीतिक मतभेद भुलाने की जरूरत: प्रणव मुखर्जी

प्रण्ाव मुखर्जी ने कहा कि यह कहना गलत है कि महंगाई को लेकर सरकार संवेदनशील नहीं है। वित्त मुखर्जी ने कहा कि विकास और मंगाई में कोई विरोधाभास नहीं है। हम चाहते हैं कि महंगाई को नियंत्रण में रखकर भारत का विकास हो। तेल की बढ़ती हुई कीमतों पर उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय मजबूरी के चलते किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले ही तेल कंपनियों को लगभग 1.22 लाख करोंड का घाटा हो चुका था। उन्होंने डीलज कारों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की भी बात कही।
संसद के मानसून सत्र में महंगाई ही सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। महंगाई पर विपक्ष के तेवर काफी तेज थे। इस वजह से मानसून सत्र के पहले 2 दिनों की कार्रवाई सुचारू रूप से नहीं चल पाई थी। जिस वजह से सरकार महंगाई पर बहस करने के लिए राजी हो गई थी। इस वजह से नियम 184 के तहत इस पर संसद के तीसरे दिन बहस शुरू हुई। इस बहस में 26 सांसदों ने हिस्सा लिया। यह बहस चौथे दिन भी जारी रही। बहस के बाद सरकार ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद महंगाई पर वॉयस वोटिंग भी होगी।












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