लोकपाल बिल पर अपने बयान से मनमोहन सिंह का यू-टर्न

Manmohan does U-turn, says no to PM under Lokpal
दिल्ली। लोकपाल में दायरे में प्रधानमंत्री पद को शामिल करने को लेकर अपने पूर्व के बयान से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पलटी मार ली है। अब वे प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में रखने के पक्षधर नहीं हैं। मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले आए प्रधानमंत्री के इस बयान से अब यह साफ हो गया है कि केंद्र सरकार लोकपाल के मुद्दे पर ज्यादा झुकने को तैयार नहीं है। सरकार अब कैबिनेट के द्वारा पास मसौदे को ही 3 अगस्त को संसद में पेश कर देगी।

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के द्वारा आहूत सर्वदलीय बैठक के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, केंद्र सरकार ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है। प्रधानमंत्री पद पर मौजूद व्यक्ति को उसके पद छोड़ने से पहले इसकी जांच के दायरे में लाना ठीक नहीं होगा। आपको बता दें कि इससे पहले मनमोहन सिंह ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद को लोकपाल की जांच के दायरे में होना चाहिए। यहां तक कि कैबिनेट की बैठक में भी वे अपने बयान पर कायम थे। पर वे रविवार को पलट गए।

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार अब अन्ना के साथ समझौता को तैयार नही है। उन्होंने कहा कि अब लोकपाल बिल का भविष्य संसद ही तय करेगा। प्रधानमंत्री की ओर से पहली बार इतने सख्त तेवर दिखाए जाने के बाद साफ है कि सरकार इस मामले पर संसद में किसी दुविधा में नहीं रहना चाहती। साथ ही अपने खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर रहे अन्ना हजारे और सिविल सोसाइटी को भी उन्होंने संकेत दे दिया है कि वे लोकपाल के सरकारी मसौदे पर ज्यादा झुकने को तैयार नहीं हैं।

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