... तो भाई-बहन भी बन सकते हैं मियां-बीवी

इस बात पर चर्चा करने से पहले आपको पूरे मामले के बारे में बातते चलें। मामला यह था कि दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस के पूर्व जज ओ पी गोंग ने याचिका दायर की थी कि उसके मजिस्ट्रेट बेटे ने अपनी ममेरी बहन से शादी की है। ईसाई बनने से पूर्व दोनों हिंदू थे और हिंदू मैरिज एक्ट के तहत इनकी शादी को वैध नहीं ठहराया जा सकता। गोंग के बेटे और उसकी ममेरी बहन ने ईसाई धर्म कबूल कर लिया था और आपस मे शादी कर ली थी। गोंग ने दोनों की शादी को अवैध ठहराने के लिए कोर्ट में अपील की थी। इस अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया है और उस शादी को वैध ठहराया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता खुद न्यायिक अधिकारी रह चुके हैं तो ऐसे में उन्हें इस तरह का मामला कोर्ट में नहीं लाना चाहिए। पिता द्वारा बेटे के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले ही ऑनर किलिंग को बढ़ावा देते हैं। यदि इसी तरह के मामलों का समर्थन करना शुरू कर दिया तो यह माना जाएगा कि अदालत भी खाप पंचायतों के निर्णय को सही मानती है। कोर्ट निजी दुश्मनी या बदला लेने की जगह नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता ओपी गोगने पर सारहीन मामला दर्ज कराने पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है।
कानूनी नजरिए में हिंदू और ईसाई धर्म की शादी
हिंदू मैरिज एक्ट 1955
भाई-बहन के रिश्ते को ब्लड रिलेशन माना जाता है। ऐसे में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत लड़की में तीन पीढि़यों और लड़के में पांच पीढि़यों तक विवाह निषेध माना जाता है।
ईसाई विवाह अधिनियम
ईसाई विवाह अधिनियम की धारा तीन के तहत धर्मातरण कर हिंदू धर्म में रिश्ते के भाई-बहन वाले आपस में विवाह कर सकते हैं।
कोर्ट का यह फैसला आपकी नजर में सही या गलत इस बारे में निचे दिये कमेंट बाक्स में जरुर लिखें। हमें आपकी प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार रहेगा।












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