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अवैध हथियारों के बाजार में टॉप पर उत्‍तर प्रदेश

Illegal Weapons
लखनऊ। हथियारों के सौदागरों में अब बिहार का नहीं बल्कि उत्‍तर प्रदेश है। पिछले कुछ महीनों के दौरान हथियारों के बाजार में उत्तर प्रदेश का वर्चस्व इस कदर बढ़ा है कि वह पहले नम्बर पर पहुंच गया। प्रदेश के कई ऐसे इलाके हैं जहां हथियारों की मण्डियां सजती हैं।

कभी पूर्वांचल में हथियारों की खरीद फरोख्त हुआ करती तो अब कानपुर, गाजियाबाद, मेरठ व आगरा जैसे इलाकों में अवैध हथियार सस्ते में बिक रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में यूपी के हथियारों को दबदबा बढ़ा है। कई आपराधिक वारदातों में ऐसे हथियार पाए गये जो यूपी में बनाए गये थे। आंकड़े बताते हैं कि देश में सलाना 25 हजार करोड़ रुपये के इस अवैध कारोबार को रोकने में पुलिस भी नाकामयाब है।

दो वर्ष पूर्व जब भी किसी को अवैध हथियारों की जरूरत होती थी वह बिहार की ओर रूख करता था लेकिन इस काले कारोबार में मोटे मुनाफे को देखते यूपी के पूर्वी इलाकों में इसका कारोबार शुरू हो गया।

आजमगढ़ व गोरखपुर में जमकर अवैध हथियार बनाए व बेचे जाने लगे। सिर्फ बड़े स्तर पर ही नहीं छोटे स्तर पर भी अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त की जाने लगी। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर महिलाओं तक ने इस काम को आगे बढ़ाया और काली कमाई की।

पूर्वांचल के तमाम इलाकों में यह अवैध कारोबार कुटीर उद्योग की चला पुलिस ने कुछ स्थानों पर छापेमारी कर हथियार बरामद कर यह साबित करने का प्रयास भी किया कि इस कारोबार को रोके जाने का काम किया जा रहा है लेकिन यह कारोबार कभी नहीं थमा। हालात यह हैं कि हथियार बनाने वाले इस इलाकों में महज पांच सौ रुपये खर्च कर कोई भी आसानी से तमंजा हासिल कर सकता है।

अवैध हथियार बनाने का कारोबार पहले सिर्फ पूर्वांचल तक ही सीमित था जहां से यह हथियार ले जाकर प्रदेश व देश के विभिन्न इलाकों में बेचे जाते हैं लेकिन यह काम खतरे भरा था। हथियार को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर बेचने से उसकी कीमत भी बढ़ जाती थी।

इसी कारण अवैध कारोबार से जुड़े लोगों ने हथियार बनाने वाले कारीगरों को प्रदेश के विभिन्न इलाकों में बसा दिया। कुछ दिनों के प्रशिक्षण के बाद कारोबार में कारीगरों की नयी खेप तैयार हो गयी। अब तो कानपुर से लेकर गाजियाबाद तक हर जगह अवैध हथियार बनाने व बेचे जाते हैं।

हथियार बनाने वालों में अधिकांश लोहार व वेल्डिंग का कार्य करने वाले कारीगर हैं। पुलिस का कहना है कि देश में जितनी भी आपराधिक वारदातें होती हैं उसमें प्रयुक्त होने वाले 92 प्रतिशत हथियार अवैध होते हैं। पिछली कुछ घटनाओं को देखें तो 27 जुलार्ई को गाजियाबाद में चेकिंग के दौरान पुलिस ने तीन हथियारों के तस्कर पकड़े जो अवैध रूप से हथियार ले जाकर बेचने की फिराक में थे।

13 जून को दिल्ली में एक कमला नाम की महिला पकड़ी गयी जिसके पास से 7 पिस्तौल व कई कारतूस मरामद हुए उसके साथ उसका एक सहयोगी भी पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान पता चला कि हथियार उत्तर प्रदेश से आए हैं।

पुलिस का कहना है कि वह लगातार इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने का प्रयास कर रही है जिसके लिए समय-समय पर छापेमारी की जाती है। सूत्रों की माने तो यह कारोबार पुलिस की जानकारी में ही चलता है क्योंकि पुलिस की मर्जी के बगैर इलाके में अवैध कारोबार करना आसान नहीं होता। पुलिस के ऊपर जब भी दबाव बढ़ता है एक दो मामले पकड़कर पुलिस खुद को पाक साफ घोषित कर देती है लेकिन छापे मारी में जितने भी हथियार पकड़े जाते हैं उससे कई गुना हथियार प्रतिमाह बनाकर बेचे जाते हैं। पढ़ें- यूपी की बड़ी खबरें।

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