अब यूपी सरकार कराएगी एनआरएचएम का ऑडिट

मुख्य सचिव अनूप मिश्र ने कैग यानि ऑडिट अधिकारी को लिए पत्र में कहा कि एनआरएचएम के बजट व्यय आदि का ऑडिट किया जाए ताकि सही बात की जानकारी हो सके। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार एनआरएचएम केन्द्र की योजना है तथा इसका संचालन भी केन्द्र के निर्देशों एवं मानकों पर होता है। सभी योजनाओं के लिए वित्तीय आदेश केन्द्र द्वारा ही दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मायावती ने एनआरएचएम में खामियों को देखते हुये इसके तहत व्ययराशि का विशेष ऑडिट कराने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि एनआरएचएम के जिलों में काम के बेहतर संचालन के लिये वित्त और लेखा अधिकारी के 72 पद हैं। प्रवक्ता का कहना है कि योजना के तहत 2010-11 में जो सामग्री क्रय की गयी तथा जो निर्माण कार्य कराए गये उनकी गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच भी करायी गयी है। उन्होंने कहा कि इसके लिये मुख्य सचिव ने परिवार कल्याण तथा चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव के साथ बैठक कर तमाम मुददों पर चर्चा की। जननी सुरक्षा योजना के लिये एक वेबसाइट विकसित की जा रही है जिस पर जिलों से इस योजना की प्रगति के बारे में नियमित सूचना दी जायेगी।
प्रवक्ता ने कहा कि इस योजना के लिये राज्य स्तर पर एक काल सेंटर भी खोला जा रहा है जिसमें लोग अपनी सलाह और शिकायतें भेज सकेंगे। ज्ञात हो कि सेन्ट्रला ऑडिट टीम जब एनआरएचएम के बजट व खर्चों का ऑडिट किया था तो कई खामियां उजागर हुई थीं। ऑडिट रिपोर्ट में टीम ने कहा कि था बीते तीन वर्षों में केन्द्र ने यूपी को 5100 करोड़ रुपये दिए जिनका करीब पचास प्रतिशत कभी खर्च ही नहीं किया गया।












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