कालेधन मामले पर दो कदम औऱ चली सरकार

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार काले धन का पता लगाने की कोशिशों में जुटी हुई है। कुछ देशों के साथ इस बाबत समझौते भी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन 86 देशों के साथ सरकार काले धन की जानकारी हासिल करने के लिए बातचीत चल रही है उनमें से 57 देशों के साथ बातचीत समाप्त हो चुकी है। जबकि 29 के साथ बातचीत अभी चल रही है। स्विट्जरलैंड से सरकार ने वहां के बैंकों में जमा काले धन की जानकारी मांगी थी, लेकिन वहां की सरकार को यह जानकारी देने के लिए अपने कानून में संशोधन की आवश्यकता थी।
हाल ही में स्विस सरकार ने भारत सरकार को सूचित किया है कि यह जानकारी वह सितंबर तक उपलब्ध कराने की स्थिति में होगी। हालांकि स्विस सरकार ने सूचनाओं के आदान प्रदान का सिलसिला इस साल अप्रैल से ही शुरू कर दिया है। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त मंत्रालय द्वारा काले धन पर गठित तीनों समितियां काम कर रही हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनके कामकाज में बाधा नहीं पड़ी है। जहां तक आर्थिक सुधारों की रफ्तार थमने के आरोपों का सवाल है, वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार आर्थिक सुधारों को लेकर प्रतिबद्ध है।
उधर, कालेधन को लेकर कैबिनेट ने भी गुरुवार को अपनी सक्रियता की छाप छोड़ी और बेनामी लेनदेन अधिनियम (रोक), 2011 लाने का फैसला किया। इसके तहत बेनामी संपत्ति जिस व्यक्ति के नाम पर होगी उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के प्रावधान हैं। हालांकि पति या पत्नी या किसी अन्य करीबी संबंधी के नाम से बेनामी संपत्ति रखने की छूट दी जा रही है। यह कानून बेनामी लेनदेन (रोक) अधिनियम, 1988 का स्थान लेगा। सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बताया कि इस कानून में पति, पत्नी, भाई व बहन या किसी कानूनी हकदार के नाम से बेनामी संपत्ति खरीदी जा सकती है, लेकिन इस बात को पूरा ब्योरा देना पड़ेगा कि आय का स्रोत क्या है।
उन्होंने बताया कि नए कानून में विस्तार से चर्चा होगी कि बेनामी संपत्ति क्या है, कौन सी बेनामी संपत्ति जायज है और किस पर प्रतिबंध है। नए कानून में गैरकानूनी तरीके से बेनामी संपत्ति रखने पर बहुत ही सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। अभी तक जिस व्यक्ति के नाम से बेनामी संपत्ति है उसके खिलाफ सजा का प्रावधान नहीं है, लेकिन नए प्रस्तावित कानून में उसे भी कम से छह महीने तक कारावास की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। अधिकतम सजा का प्रावधान दो वर्ष और इसके अलावा आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।












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