बीमार उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र ने नहीं भेजी एम्बुलेंस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीमार है और केंद्र को कोई फिक्र नहीं, जी हां केंद्र सरकार इस बीमार यूपी के लिए एम्बुलेंस तक भेजने से मना कर दिया। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के बजट के बाद आप यही बात कहेंगे।
साफ शब्दों में कहें तो स्वास्थ्य मिशन के बजट में हुई गड़बड़ी के बाद उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग पर सख्ती करते हुए केन्द्र ने एक हजार एम्बुलेंस खरीदे जाने के प्रस्ताव का केन्द्र ने रद्द दिया। कहा गया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 998 एम्बुलेंस खरीदे जाने की बात की गयी। सौ के करीब एम्बुलेंस जिलों में भेजी गयीं जबकि खबर मिली कि 600 एम्बुलेंस अभी भी कम्पनी के यार्ड में खड़ी हैं जिनकी खोज खबर लेने वाला कोई नहीं।
केन्द्र के इस रूख से स्वास्थ्य महकमें में बेचैनी बढ़ गयी है। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष के लिए 2223 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ जबकि गत वर्ष के बजट का बगैर खर्च हुआ 521 करोड़ रुपया अभी भी राज्य के एनआरएचएम के खाते है।
परिवार कल्याण में विभाग में तीन चिकित्साधिकारियों की हत्याओं व ऑडिट के दौरान एनआरएचएम के बजट में मिली खाामियों के चलते केन्द्र ने राज्य के परिवार कल्याण महानिदेशालय की ओर से आंखे फेर ली हैं। बीते दिनों राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वय समिति ने परिवार कल्याण महानिदेशालय द्वारा भेजे गए 1012 एम्बुलेंस खरीद के बजट का रद्द कर दिया। उत्तर प्रदेश के परिवार कल्याण विभाग ने एनआरएचएम के बजट से 998 एम्बुलेंस खरीदने की बात की।
एम्बुलेंस कहां और किस संख्या में खरीदी गयीं तथा मरीजों को उनका कितना लाभ मिला इस बात का सही लेखा जोखा विभाग के पास नहीं है। विभागीय अधिकारियों ने केन्द्र को सिर्फ यह बताया कि एम्बुलेंस ले ली गयी हैं तथा मरीज हित में उनका प्रयोग हो रहा है। एमआरएचएम में हुई गड़बडिय़ों की सूचनाओं के बाद जब केन्द्र ने राज्य सरकार से पूर्व में ली गयी एम्बुलेंस का उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगा तो अधिकारी बगले झांकने लगे।
फिर क्या था नयी एम्बुलेंस के प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। विभाग ने 1012 एम्बुलेंस खरीदने का जो प्रस्ताव भेजा था उस 108 करोड़ खर्च होने थे। सूत्रों की माने तो पूर्व में जिन एम्बुलेंस खरीद की बात की गयी वह अभी भी खरीद कंपनी के यार्ड में ही हैं।
ज्ञात हो कि पिछले वित्तीय वर्ष में एनआरएचएम योजना के तहत 998 एम्बुलेंस की खरीद की गयी थी। इसमें से मात्र एक सौ के करीब ही जिलों में भेजी गयी थीं। राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वय समित ने प्रस्ताव को यह कह कर रद्द कर दिया कि राज्य को इनकी जरूरत नहीं है क्योंकि वहां पहले से ही बड़ी संख्या में एंबुलेंस हैं जिनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। पढ़ें- उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें












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