पदोन्नति के दौड़े कई पुलिस बेहोश एक की मौत

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का हाल क्या होगा जब राज्य की पुलिस 10 किलोमीटर तक दौड़ नहीं लगा सकती। राज्य के 18 जिलों के लिए पुलिस भर्ती बार्ड ने पिछले दिनों लिखित परीक्षा आयोजित की। परीछा में उत्तीर्ण पुलिस कर्मियों को दस किलोमीटर की दौड़ 75 मिनट में पूरी करनी थी।
दौड़ शुरू की गयी तो कई पुलिस कर्मियों के यह जानकार पसीना आ गया कि उन्हें दस किलोमीटर तक बगैर रूके दौड़ लगानी है। लेकिन किसी को नौकरी पानी थी तो किसी को पदोन्नति आखिर दौडऩा तो सभी को था। जैसे-तैसे दौड़ शुरू हुई दौड़ शुरू होते ही कुछ पुलिस कर्मी हांफने लगे और इधर-उधर छिपने का प्रयास करने लगे। कुछ ने हिम्मत जतायी और कुछ दूर दौड़ लगायी। बढ़े हुए पेट व सेहत के साथ दौड़ लगा रहे पुलिस कर्मी एक-एक कर बेहोश होते चले गए।
कानपुर की बात करें तो दौड़ लगाते हुए 14 पुलिस कर्मी बेहोश हुए जिन्हें स्टे्रचर पर लादकर चिकित्सालय पहुंचाया गया। उधर मेरठ में भी दौड़ हुई जिसमें सात पुलिस कर्मी बेहोश हुए जिन्हें चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। मेरठ में 44वीं पीएसी में तैनात एक आरक्षी की हालत इतनी बिगड़ गयी कि चिकित्सालय में उसकी मौत हो गयी। राज्य के पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था ए.पी.माहेश्वरी आरक्षी की मौत की पुष्टि की तथा बताया कि सीतापुर में हुई दौड़ में चार पुलिस कर्मी बीमार हो गए।
उन्होंने कहा कि प्रोन्नति नियमानुसार की जा रही है। माहेश्वरी ने बताया कि पूर्व में भी राज्य में रैंकर पदोन्नति के दौरान तीन पुलिसकॢमयों की मौत हो गयी थी और राज्य सरकार ने इस तरह की दौड पर रोक लगा दी थी। उनका कहना है कि चिकित्सालय में भर्ती पुलिस कर्मियों की हालत ठीक है और अधिकांश का घर जाने की इजाजत दे दी गयी है।












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