चुनावी फायदे के लिए शीला दीक्षित ने किए झूठे वायदे: लोकायुक्त

Lokayukta slams Delhi chief minister
दिल्ली। दिल्ली के लोक निर्माण मंत्री राजकुमार चौहान के बाद दिल्ली के लोकायुक्त मनमोहन सरीन ने सूबे की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोकायुक्त ने शीला दीक्षित पर चुनावी वादे के जरिए राजनीतिक फायदा उठाने का दोषी ठहराया है। लोकायुक्त ने रिपोर्ट में कहा है कि मुख्यमंत्री जैसे अहम पद पर बैठ व्यक्ति से इस तरह के झूठ बोलने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। आपको बता दें कि शीला दीक्षित से पहले भी दिल्ली सरकार के एक अन्य मंत्री राजकुमार चौहान को लोकायुक्त ने पद के दुरुपयोग का दोषी पाया गया था। लोकायुक्त ने राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेजकर चौहान को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी, लेकिन राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय की सलाह लेने के बाद लोकायुक्त की वह रिपोर्ट खारिज कर दी थी।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले शीला दीक्षित ने 6 हजार परिवारों को सस्ते मकान देने का वादा किया था। लेकिन इनमें से एक को भी मकान नहीं दिया गया। ये मकान राजीव गांधी रत्न आवास योजना के तहत बनाए जाने थे। लोकायुक्त ने अपनी यह रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी है। रिपोर्ट में मुख्यमंत्री को भविष्य में इस प्रकार के वायदे व संदेश देने में सावधानी बरतने की चेतावनी देने का आग्रह किया है। हालांकि लोकायुक्त ने इस मामले को शीला दीक्षित के खिलाफ आंचार संहिता उल्लंघन का मामला मानने से इंकार कर दिया। इस मामले में मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्होंने किसी को गुमराह नहीं किया है। सोमवार को दिल्ली सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में शीला दीक्षित ने कहा कि गरीबों के लिए बनाए जा रहे फ्लैट तैयार हो चुके हैं और लोगों से जो वादा किया गया था उसे पूरा किया जाएगा। लोकायुक्त मनमोहन सरीन ने मुख्यमंत्री से जुड़ा फैसला सुनीता भारद्वाज नामक एक अधिवक्ता एवं भाजपा नेता की शिकायत पर सुनाया है।

सीबीआई ने भी कसा शिकंजा

राष्ट्रमंडल खेल के तहत हुए निर्माण कार्य में कथित घोटालों को लेकर सीबीआई ने दिल्ली सरकार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि इसी संदर्भ में बारापुला एलिवेटिड मार्ग को लेकर दो अधिकारियों से सीबीआई ने पूछताछ की। इस बारे में जब मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। गौरतलब है कि अधिकारी बारापुला एलिवेटिड मार्ग के निर्माण के समय लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे। बारापुला मार्ग की जांच सीबीआई कर रही है। इस मार्ग के निर्माण में हुए कथित घोटालों को लेकर सीबीआइ की तरफ से एक एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

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