कृष्ण की नगरी ब्रजभूमि में सावन उत्सव

ब्रज नगरी में सावन के शुरू होने वाला उत्सव कृष्ण जन्माअष्टमी तक विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। इन उत्सवों में हिंडोले में झूला, घटाएं, रासलीला और गौरांगलीला प्रमुख हैं। यहां श्रावण मास के कृष्णपक्ष से मंदिर में दो चांदी के और एक सोने का हिंडोला डाला जाता है। इन हिंडोलों में भगवान कृष्ण का झुलाया जाता है।
सावन में यहां घटा महोत्सव का भी आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न रंग की आकर्षक घटा में कान्हा की लीलाओं का प्रस्तुतीकरण होता है। लहरिया घटा पर इस मंदिर में इन तीन हिंडोलों के साथ साथ जरी, फल, फूल, फूलपत्ती, काष्ठ, केले के तने का हिंडोला भी डाला जाता है।
इस मंदिर में भी रंग बिरंगी घटाएं डालकर प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जाता है। मंदिरों की कालीघटा देखने के लिए लाखों लोग इन मंदिरों में आते हैं। वृन्दावन में हरियाली तीज भी काफी धूमधाम से मनायी जाती है। इस बार यह तीज दो अगस्त को है।
ब्रज के प्राचीन राधाबल्लभ मंदिर में हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक चांदी, केले, फूल व पत्ती आदि के हिंडोले डाले जाते हैं तथा पवित्रा एकादशी पर ठाकुर जी पवित्रा धारण करते हैं। हरियाली तीज से पंचमी तक ठाकुर जी स्वर्ण हिंडोले में और उसके बाद पूर्णिमा तक चांदी, जडाऊ, फूलपत्ती आदि के हिंडोले में झूलते हैं।
ब्रज के अन्य मंदिरों में जहां हिंडोले में श्यामा श्याम झूलते हैं वहीं ब्रज में एक ऐसा मंदिर है, जहां जहां पूरे सावन भर हिंडोले में कृष्ण बलराम झूलते हैं। दाऊ जी मंदिर बल्देव एवं गिरिराज मुखारबिन्द मंदिर जतीपुरा में हिंडोले में ठाकुर जी की प्रतिमा के प्रतिबिम्ब को झुलाया जाता है।
यहां श्रावण मास में मनायी जाने वाली रासलीला भी कम आकर्षक नहीं है। वृन्दावन का प्रमुख आकर्षण विश्वप्रसिद्ध रासाचार्यो द्वारा रासलीला प्रस्तुत की जाती है। जिनमें कृष्ण लीलाओं का इतना जीवन्त प्रस्तुतीकरण होता है। कुल मिलाकर सावन में यहां हर ओर उत्साह का माहौल बना रहता है।












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