राजनाथ की नजर पीएम की कुर्सी पर

अटल बिहारी बाजपेयी के बाद पार्टी में ऐसे नेता की कमीं हो गयी है जो प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त हो। लाल कृष्ण आडवाणी हो, सुषमा स्वराज या फिर अरूण जेटली सभी प्रधानमंत्री की दौड़ में हैं। ऐसे में इन नेताओं में कोई भी नहीं चाहता कि राजनाथ भी इस दौड़ में शामिल हों।
कुछ सप्ताह पूर्व लखनऊ के साइंटिफिक कन्वेंशन सेन्टर में भारतीय जनता पार्टी की राष्टीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के कई बड़े नेता जुटे और इस बारे में गहन चर्चा की गयी कि यदि भाजपा की सरकार केन्द्र में बनती है तो फिर पीएम की कुर्सी पर कौन होगा।
नेताओं ने आडवाणी को तो जैसे तैसे मना लिया लेकिन राजनाथ के रूप पार्टी के पास एक ऐसा नेता था जो पीएम बनने के लिए पूरी तरह ये योग्य है। बावजूद इसके पार्टी के कई वरिष्ठ व पुराने नेता ऐसा नहीं चाहते है कि राजनाथ सिंह पीएम बने क्योंकि जिन लोगों ने राजधानी दिल्ली में बैठकर अटल बिहारी बाजपेयी व लाल कष्ण आठवाणी के साथ कार्य किया हो उनके समकक्ष कोई आकर खड़ा हो जाए यह बात उन्हें कैसे स्वीकार हो।
पार्टी सूत्रों के अनुसार इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए राजनाथ को यूपी भेज दिया गया ताकि वह कुछ समय ही सही दिल्ली सेदूर रहें। हालांकि राजनाथ के समर्थक इस बात के लिए प्रयास कर रहे हैं कि वह यूपी नहीं बल्कि दिल्ली की गददी पर बैठें।
उमा भारती को यूपी का प्रभारी बनाया गया है यह भी जानबूझकर किया गया लेकिन उमा भारती के बाद राजनाथ को यूपी काप्रभारी बनाया जाना पार्टी के कुछ नेताओं की ही साजिश थी हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बात से इनकार करते हैं। खुद राजनाथ ने भी कहा था कि वह यूपी सिर्फ उमा भारती की मदद के लिए आए हैं। जबकि दिल्ली की कुर्सी की दौड़ में शामिल राजनाथ को बहुत सोचसमझकर दूर कर दिया गया है।












Click it and Unblock the Notifications