जनगणना: लोगों को रास आ रही है शहरी जिंदगी

इस जनगणना में भारत की कुल आबादी 121 करोड़ है। इसमें 83 करोड़ आबादी गांव में रहती है और शेष 37.7 करोड़ आबादी शहरों में रहती है। इस जनगणना से पहले भारत की कुल आबादी में से लगभग 72 फीसदी आबादी गांवों में निवास करती थी। कृषि ही उनका मुख्य रोजगार है। अब हालात बदले हैं शिक्षा स्तर के बेहतर होने की वजह से गांवों से निकलकर लोग रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में शहरों की तरफ आ रहे हैं। अब शहरों की आबादी बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई है जो पहले 28 प्रतिशत थी।
जनगणना की जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह गावों और शहरों की आबादी के तुल्नात्मक आंकड़ों की जानकारी दी। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौलि ने जानकारी दी कि ऐसा पहली बार हुआ है जब शहर की जनसंख्या में गांव की जनसंख्या से ज्यादा इजाफा हुआ है। पिछली जनगणना के बाद इस साल 2011 में दस साल बाद जनगणना हुई है। जनगणना के अनुसार देश की आबादी में 18.14 करोड़ का इजाफा हुआ है। इसमें शहर की आबादी में 9.10 करोड़ जबकि गांव की आबादी में 9.04 करोड़ का इजाफा हुआ है।
इस जनगणना में अगर लिंग अनुपात की बात की जाए तो इसमें महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। गांवों में जो पहले लिंगानुपात 946 था अब वह 947 हो गया है। इसके अलावा शहरी आबादी में लिंगानुपात 900 से बढ़कर 926 से हो गया है। सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों की बात की जाए तो उत्तरप्रदेश की आबादी 15.50 करोड़ है। देश की कुल आबादी में उत्तर प्रदेश की आबादी का 18.6 प्रतिशत है। इसके बाद बिहार का नंबर आता है। बिहार की आबादी 9.207 है जो देश की कुल आबादी का 11 प्रतिशत है। तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है जिसकी आबादी 6.22 करोड़ है। यह कुल आबादी का 7.5 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में 5.08 करोड आबादी शहरों मे निवास करती है जो कुल शहरी आबादी का 13.5 प्रतिशत है।












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