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हाल घटनास्‍थल से- चारों तरफ खून, वाहनों के परखच्‍चे और लोगों की चीखें

मुंबई। बुधवार शाम 6:45 बजे, मुंबई के जवेरी बाजार की शकील मेनन रोड पर स्थित मुंबादेवी मंदिर के पास एक जबर्दस्‍त धमाका हुआ। इसके दो मिनट के अंदर ओपेरा हाउस इलाके में दूसरा धमाका हुआ। तीसरा धमाका 7 बजे खाने पीने के लिए मशहूर खाओ गली में हुआ। ये तीनों धमाके बीच बाजार में हुए। तीनों धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आस-पास खड़े वाहनों के परखच्‍चे उड़ गये। चारों तरफ खून बिखरा पड़ा था।

खाओ गली जहां चारों तरफ पकवान नजर आते थे, वहां खून की छींटें, वाहनों के परखच्‍चे और इधर-उधर भागते लोग दिखाई दे रहे थे। चारों तरफ चीख-पुकार का मंजर। किसी का हाथ उड़ गया तो किसी का पैर। कहीं ऐसे शव पड़े जिनके सिर नहीं, तो कहीं शवों के हाथ गायब। यह मंजर इतना भयावह था कि किसी की भी रूह कांप उठे। जवेरी बाजार दादर के बस स्‍टॉप पर हुए धमाके के बाद का मंजर भी दर्दनाक था। यहां पर खड़ी मारुति एस्‍टीम कार पूरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो गई। बस स्‍टॉप के बगल में खड़ी इस कार में तीन लोग थे, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई। यहां पर लोगों का अंदाजा है कि बम स्‍कूटर में रखा गया था।

देखें- मुंबई धमाके की तस्‍वीरें

वहीं ओपेरा हाउस और जवेरी बाजार में भी धमाकों के बाद का मंजर कुछ यही तस्‍वीर बयां कर रहे थे। तीनों स्‍थानों पर अफरा-तफरी मची हुई थी। लोग इधर-उधर भाग रहे थे। बताया जा रहा है कि ओपेरा हाउस में बम को एक टिफिन में प्‍लान किया गया था, जबकि जवेरी बाजार में बम एक छाते के नीचे रखा था।

धमाके के चश्‍मदीद मोहम्‍मद नज़ीर ने बताया कि जिस समय धमाका हुआ उस समय वो जवेरी बाजार में ही थे। उन्‍होंने बताया कि धमाका इतना जबर्दस्‍त था कि उनके कान सुन्‍न पड़ गये। नजीर अपनी जान बचाने के लिए वहां से दूर भाग गये, लेकिन जब वो वापस लौटे तो वही भयावह मंजर दिखा। नज़ीर ने बताया कि उन्‍होंने वाहनों के बीच में हाथ पड़ा देखा।

ओपेरा हाउस में धमाके के चश्‍मदीद राजीव रत्‍नाकर ने बताया, "मैं सब्‍जी लेने निकला था। जैस ही रोड की ओर आगे बढ़ा, तेज धमाका सुनाई दिया। लोग इधर-उधर भागने लगे। पहले मुझे कुछ समझ नहीं आया, लेकिन पांच मिनट के अंदर सारी तस्‍वीर साफ हो गई। भीड़ छंटी तो मौके पर पुलिस पहुंची और घटना स्‍थल को चारों तरफ से घेर लिया गया। भीड़ के बीच से मैनें आगे बढ़कर देखा तो एक युवक का शव जमीन पर पड़ा था, जिसके सिर के चीथड़े उड़ गये थे।"

इससे भी भयावह दृश्‍य केईएम अस्‍पताल में देखने को मिला, जहां एक-एक कर घायलों को लाया जा रहा था। किसी के हाथ पर तो किसी के पैर पर, किसी के सिर पर तो किसी के पेट पर जख्‍म भरे पड़े थे। कई घायलों के कपड़े फटे हुए थे। कई घायल धमाके नहीं बल्कि भगदड़ के बीच भीड़ के नीचे आकर घायल हुए।

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