मनमोहन की केबिनेट में मामूली फेरबदल

रेल मंत्रालय उम्मीद के मुताबिक ही तृणमूल कांग्रेस के पास ही रहा है। ममता बनर्जी के करीबी और तृणमूल के सांसद दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा बेनी प्रसाद वर्मा को इस्पात मंत्रालय की बागडोर सौंपी गई है। जयराम रमेश की जगह जयंती नटराजन नई पर्यावरण मंत्री होंगी। इसके अलावा किशोर चंद देव को पंचायती राज्य मंत्री का ओहदा सौंपा गया है।
जैसी कि अटकलें लगाई जा रही थीं कि आर्थिक मामलों के मंत्री मुरली देवड़ा ने अपने बेटे मिलिंद देवड़ा को मंत्रालय में शामिल करने के लिए ही इस्तीफा दिया था। आज के केबिनेट फेरबदल में भी यह साफ हो गया है। उनके बेटे मिलिंद देवड़ा को सूचना राज्य मंत्री बनाया गया है। अपने बेटे को मंत्री पद देने की इच्छा मुरली देवड़ा ने प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी से जाहिर की थी।
मनमोहन ने अपने 4 बड़े मंत्रालयों गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है। पिछले कुछ दिनों से गृहमंत्री और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की छुट्टी होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। वहीं ए राजा के बाद दूर संचार मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे कपिल सिब्बल से यह मंत्रालय वापस नहीं लिया गया है। इसके अलावा गठबंधन में शामिल डीएमके से किसी का नाम केबिनेट में शामिल नहीं किया गया है।
इस केबिनेट फेरबदल में 5 मंत्रियों की छुट्टी भी हुई है। इनमें एम.एस. गिल, बीके हांडिक, कांति लाल भूरिया, ए. साई प्रताप और अरुण यादव के नाम शामिल हैं। केबिनेट में नए चेहरों की बात की जाए तो कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन और पवन सिंह घाटोवर को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया गया है। वहीं गठबंधन का ख्याल रखते हुए तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय को केबिनेट राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। कांग्रेस के चरण दास महंत, जीतेंद्र सिंह और राजीव शुक्ला को भी कैबिनेट राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है।
कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन और पवन सिंह घाटोवर को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया गया है। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय, कांग्रेस के चरण दास महंत, जीतेंद्र सिंह, मिलिंद देवड़ा और राजीव शुक्ला को कैबिनेट में राज्य मंत्री बनाया गया है।
मनमोहन सिंह ने केबिनेट में फेरबदल के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से 2 हफ्तों में ही 4 मुलाकातें कर डाली थीं। उस समय ऐसा लग रहा था कि वे अपनी केबिनेट में बड़े फेरबदल करने जा रहे हैं। केबिनेट में किए इस फेरबदल को महज एक औपचारिकता के हिसाब से देखा जा सकता है। शुरुआत में जिन बड़े नामों में बदलावा की अटकलें लगाई जा रही थीं वैसा कुछ नहीं हुआ।












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