दिनाकरन पर महाभियोग का रास्ता साफ

सुप्रीम कोर्ट ने हामिद अंसारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति से वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव को हटाने की दिनाकरन की मांग तो मान ली, लेकिन अभी तक की जांच निरस्त करने और जांच समिति का आदेश खारिज करने की मांग ठुकरा दी है। साथ ही दिनाकरन की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा, उन्होंने जानबूझकर जांच लटकाने के इरादे से राव के समिति में शामिल होने पर देरी से सवाल उठाया। अदालत के इस फैसले के साथ ही दिनाकरन के खिलाफ जांच पर लगी रोक भी हट गई है।
हामिद अंसारी ने दिनाकरन पर लगे आरोपों की जांच के लिए जनवरी 2010 में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आफताब आलम समिति के अध्यक्ष हैं, जबकि कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेर और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव सदस्य हैं। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व चंद्रमौलि प्रसाद की पीठ ने जांच समिति का गत 24 अप्रैल का आदेश निरस्त करने की जस्टिस दिनकरन मांग ठुकरा दी। हालांकि पीठ ने राव पर पक्षपाती होने के आरोप को देखते राज्यसभा सभापति से अनुरोध किया है कि वे जांच समिति में पीपी राव की जगह किसी और प्रख्यात कानूनविद को शामिल करें।
कोर्ट ने साफ किया कि दिनाकरन के खिलाफ राज्य सभा द्वारा पारित नोटिस ऑफ मोशन में तय किए गए 12 आरोपों की जांच शुरू से नहीं होगी, बल्कि जहां तक जांच हो चुकी है उसके आगे से होगी। आरोप तय होने के स्तर से ही जांच शुरू होगी। पीठ ने कहा, जस्टिस दिनाकरन चतुर व्यक्ति है। उन्हें मालूम है कि न्यायाधीश जांच नियम 1969 के तहत आरोप तय होने के तीन माह के भीतर जांच समिति के अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सभापति को सौंपनी पड़ती है, इसलिए वह रिपोर्ट में देरी की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। यह याचिका सिर्फ देरी करने के इरादे से दाखिल की गई है।












Click it and Unblock the Notifications