बाल ठाकरे तो सोने की अंडा देने वाली मुर्गी हैं, उनको नहीं मारता: हेडली

हेडली ने कहा है कि शिव सेना सु्प्रिमो बाल ठाकरे कभी भी लश्कर-ए-तैयबा के निशाने पर थे ही नहीं। उसका साफ कहना है कि ठाकरे की हत्या के बारे में कभी सोचा ही नहीं गया।हेडली ने पूरे मामले में एक नया खुलासा करते हुए कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा तो बाल ठाकरे को मारने के बजाय उनका इस्माल करना चाहता था।
हेडली के बयान के मुताबिक लश्कर नेतृत्व चाहता था कि किसी भी तरह से बाल ठाकरे को अमेरिका बुला लिया जाये ताकि शिव सेना नेता द्वारा वहां दिए गये भड़काऊं भाषण से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को फायदा पहुंच सके।
हेडली ने यह पाकिस्तानी मूल के एक अन्य आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ अमेरिकी अदालत में चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान की। जिसमें उसने भारत में शिव सेना को एक प्रभावी संगठन करार दिया था। हेडली का कहना था कि ठाकरे की हत्या करना एक बेवकूफी भरा कदम होता।
उसके अनुसार, ऐसा करना सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मारने जैसा होता। ऐसे में अब यह सोचने वाली बात है कि हेडली के बदलते बयानबाजी का क्या मतलब है? इस बात पर ऐसे कैसे भरोसा कर लिया जाये कि हेडली ने जो कुछ भी खुलासे किये हैं उनमें शत प्रतिशत सच्चाई है? मगर इन सब बयानों से एक बात तो साफ हो चुका है कि हेडली और लश्कर-ए-तैयबा की सोच भारतीय लोगों का फायदा उठाकर उनकी मदद से देश में आतंक फैलाना है।
मालूम हो कि जब यह बात सामने आई थी कि हेडली के निशाने पर शिव सेना कार्यलय और सुप्रिमो बाल ठाकरे थे तो बाल ठाकरे ने कहा था कि उन्होंने ऐसे 50 हेडली देखें है और बाल ठाकरे का बाल बांका करने से पहले लश्कर-ए-तैयबा को सैकड़ों बार सोचना पड़ेगा।












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