सशस्‍त्र सीमा बल के जवानों पर एचआईवी+ नागिनों का हमला

SSB Jawans, Vishkanya
कभी-कभी हम दुश्‍मन की ताकत की बजाय अपनी कमजोरियों से ही हार जाते हैं। यह कहावत वर्तमान में भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्‍त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों पर सटीक बैठती है। सरहद पार से आने वाली हर एक चुनौती को अपने सीने पर झेलने वाले ये जवान अपने ही सीने में उठ रहे दंश को नहीं झेल पा रहे। इसे दुश्‍मन की चाल कहना सही नहीं होगा मगर इससे नजरअंदाज करना होना भी उचित नहीं है।

लगभग 85 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल की खुली सरहद की चुनौतियों के बीच एसएसबी के जवानों को एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह चुनौती खुद उनके स्‍वास्‍थय की है। घर और परिवार से लम्‍बे समय की जुदाई के बाद इन जवानों की गलतियों ने इन्‍हें एचआईवी संक्रमित कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में जानकारी देते हुए आपको बता दे कि भारत-नेपाल सरहद पर तैनात सशस्‍त्र सीमा बल के आधा दर्जन जवान एचआईवी पॉजिटिव पाए गये हैं।

इस जानकारी के बाद सकते में आ चुका एसएसबी का खुफिया विंग अब सक्रिय हो चुका है। सूत्रों पर भरोसा करें तो ऐसा माना जा रहा है कि नेपाल मूल की ऐसी लड़कियां जवानों के आस-पास भेजी जाती हैं जो एचआईबी संक्रमित होती है। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ पाकिस्‍तान और चीन का हाथ हो सकता ह‍ै क्‍योंकि नेपाल ही एक ऐसा देश है जो घुसपैठियों का सॉफ्ट टारगेट बन गया है।

भारत-नेपाल सरहद की सुरक्षा एसएसबी के हाथों में हैं। नेपान सीमा से लगे यूपी का म‍हराजगंज जनपद जहां एसएसबी की सात कंपनियां तैनात हैं, जिनमें करीब साढ़े नौ सौ से अधिक जवान हैं। महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप में ग्रामीणों से इनकी आए दिन झड़प होती रहती है। इस पर जवानों को न सिर्फ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का शिकार होना पड़ता है, बल्कि एसएसबी की किरकिरी भी होती है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इसलिए कुछ जवानों ने कई ऐसी महिलाओं से संबंध बना लिए, जो देह का धंधा करती थीं। इसकी सजा उन्हें एचआईवी पाजिटिव होने के रूप में मिली है। पिछले सितंबर में सिद्धार्थनगर जनपद के नौतनवा कस्‍बे में आई रेड रिबन एक्सप्रेस की टीम को करीब चालीस जवानों ने अपने खून का नमूना दिया। बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट में 6 जवान एचआईबी पॉजिटिव पाए गये हैं। इससे पीडि़त जवाने गुप्‍त रूप से इलाज भी करा रहे हैं। चूंकि, ऐसे मरीजों की पहचान गुप्त रखी जाती है, इसलिए यह सनसनीखेज मामला जिला स्वास्थ्य महकमा के रिकार्ड में कहीं लिखित रूप से नहीं है।

इस संबंध में जब डीआईजी एसएसबी से फोन पर बात की गई तो उन्‍होंने जानकारी देने से मना कर दिया। उन्‍होंने कहा कि मैं अभी गैरजनपद हूं और अपने निजी काम से हूं तो इस संबंध में बात करना उचित नहीं होगा। ऐसा में डीआईजी साहब की चुप्‍पी तो सिर्फ इसी तरफ इशारा कर रही है कि या तो डीआईजी एसएसबी की किरकिरी होने देना नहीं चाहते या फिर वह इन सबको बकवास मानते हैं।

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