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लोकपाल बिल पर असहमति, अन्ना करेंगे अनशन

No consensus on Lokpal, Anna may rethink fast
दिल्ली। समाज सेवी अन्ना हजारे का लोकपाल के मुद्दे पर अब अनशन लगभग तय लग रहा है, क्योंकि सरकार द्वारा बुलाई गई राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक में इस बाबत कोई नतीजा नहीं निकल सका। हालांकि राजनीतिक दल एक मजबूत लोकपाल की बात कर रहे हैं पर आशा है कि इस मुद्दे पर सरकार संसद के मानसून सत्र में ही कुछ रूपरेखा तय कर सकेगी।

सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में सभी दलों ने देश में लोकपाल व्यवस्था का समर्थन किया और एक सुर में सरकार से मानसून सत्र में मजबूत-प्रभावी लोकपाल के लिए विधेयक संसद में लाने की मांग की है। हालांकि भाजपा ने इस बैठक में भी अपने विचारों पर ताला लगाए रखा पर टीडीपी, इनेलो व एम करुणानिधि की अगुवाई वाली द्रमुक जैसे दलों ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखने की मांग की।

लोकपाल पर राजनीतिक दलों के साथ पहली बार हुए विचार-विमर्श में मनमोहन सिंह ने शुरू में ही साफ कर दिया कि सरकार प्रभावी लोकपाल के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उसे अन्य संस्थानों, कानूनों व संविधान के मूल ढांचे में काम करना होगा। सरकार उच्च स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मजबूत व प्रभावशाली लोकपाल के गठन की हिमायती है। बैठक में लोकसभा में नेता विपक्ष और भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज ने सभी दलों से बातचीत में इतनी देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, सरकार के मंत्रियों द्वारा बनाए गए मसौदे पर उन्हें सख्त ऐतराज है।

लोकपाल की चयन प्रक्रिया, अधिकार क्षेत्र और कैसा व्यक्ति हो के सवाल पर भी आपत्ति जताई। सुषमा स्वराज ने कहा, भाजपा मजबूत व प्रभावी लोकपाल के पक्ष में है जो पारदर्शी तरीके से चुना जाए और निष्पक्षता से काम करे। इसके लिए सरकार मानसून सत्र में बिल लाए और उसे स्थायी समिति को भेजा जाए, जहां पर राजनीतिक दल, राज्य सरकारें व जन संगठन अपनी प्रतिक्रिया दे सकें। इसके बाद शीतकालीन सत्र में विधेयक को मंजूरी के लिए रखा जाए।

प्रधानमंत्री को इसके दायरे में रखने के सवाल को वे टाल गई और कहा, पार्टी अपनी राय संसद में रखेगी। बैठक में हस्तक्षेप करते हुए राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने मंत्रियों द्वारा तैयार मसौदे की कमियों का जिक्र किया और कहा पहले सरकार विधेयक को ठीक करे, उसके बाद अपनी राय रखेंगे। इस पर प्रणब मुखर्जी ने कहा, अभी तो यह मसौदा तात्कालिक तौर पर रखा गया है, जब विधेयक आएगा तो कमियों को दूर कर दिया जाएगा। बैठक में राजग के अन्य दलों की राय भी भाजपा की तरह ही रही। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार व टीम अन्ना का मसौदा रखा गया।

सरकारी मसौदे के प्रावधानों पर दलों में गंभीर मतभेद रहे। बड़े दलों की चुप्पी के बीच वामपंथी दलों के साथ तेलुगुदेशम, इनेलो और द्रमुक ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखने की मांग की, जबकि अन्नाद्रमुक व नेशनल कांफ्रेंस ने इसका विरोध किया। अन्य दलों ने इस पर सीधे तौर पर कोई बात नहीं कही। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव व मोहन सिंह, बहुजन समाज पार्टी के सतीश, लालू प्रसाद यादव, सीताराम येचुरी ने सरकार से सशक्त व प्रभावी लोकपाल विधेयक संसद में लाने की मांग की। बैठक का शिवसेना ने विरोध किया।

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