'मायाजाल' के शिकार हुए इंतजार आब्दी बॉबी

राजधानी के चर्चित सैफी हत्याकाण्ड में नाम आने के बाद बॉबी को राज्य मंत्री का दर्जा तो समाप्त हो ही गया था अब उनके गन्ना संस्थान अध्यक्ष के पद कार्यकाल भी समाप्त हो गया। कुछ समय के लिए सिर आंखों पर बैठाए जाने के बाद बॉबी की हैसियत फिर पहले के समान हो गयी।
ज्ञात हो कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के आवास पर हुए अग्नि काण्ड में छात्र नेता इंतजार आब्दी बॉबी का नाम आया। बॉबी का नाम आने के बाद पुलिस उस तक पहुंचती इससे पहले ही सरकार ने उन्हें गोद में उठा दिया। श्रीमती जोशी को घर जलाने के बदले बॉबी को सजा मिलना तो दूर उसे इनाम अवश्य मिल गया। देखते ही देखते बॉबी लालबत्ती गाड़ी से घुमने लगा और राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त हो गया।
राज्य सरकार ने उन्हें गन्ना संस्थान का अध्यक्ष बनाते हुए अपने करीब बैठने का मौका दिया। विपक्ष ने बॉबी को राज्यमंत्री बनाए जाने पर उंगली उठायी तो सरकार ने यह कहकर सबको चुप करा दिया कि बॉबी को राज्यमंत्री आगजनी से पहले ही बना दिया गया था। इसके बाद तो बॉबी की लॉटरी लग गयी उसने कई ऐसे कार्यों को अंजाम दे डाला। जो शायद सरकार को अच्छे नहीं लगे। इसी बीच रीता बहुगुणा जोशी के घर जलाए जाने की जांच कर रही सीबीसीआईडी ने जब बॉबी का नाम लिया तो उसे जेल जाना पड़ा।
मामला इस पर भी नहीं थमा राजधानी के चर्चित सैफी हत्याकाण्ड में पुलिस ने कुछ सबूत जुटाए तो शक की सुई बॉबी की ओर पहुंच गयी। विपक्षी को फिर मुद्दा मिला और राजनीति गरमा गयी। इसी बीच मायावती के सरकारी प्रवक्ता ने अचानक बयान दे दिया कि बॉबी तो राज्य मंत्री हैं ही नहीं।
सरकारी बयान यह साबित करने के लिए काफी था कि बॉबी एक बार फिर आम आदमी की श्रेणी में पहुंच गए। आने वाले कुछ दिनों में गन्ना संस्थान के अध्यक्ष के पद कार्यकाल समाप्त हो रहा है। देखना है कि इस बार सरकार बॉबी का लेकर क्या बयान जारी करती है फिलहाल बॉबी व उनके चाहने वाले सरकार को मनाने का प्रयास कर रहे हैं कि बॉबी किसी तरह सरकार के आस-पास बने रहें।
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