किसानों की ऋण माफी चाहती हैं मायावती

Mayawati
लखनऊ। प्रदेश की मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दांव खेलते हुए बुन्देलखण्ड के किसानों की ऋणमाफी का प्रस्ताव केन्द्र के सामने रख दिया। ऋणमाफी की बात मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ऊपर डालते हुए उन्हें पत्र लिखा। पत्र के माध्यम से मायावती ने अपील की कि जिले के हालात देखते हुए किसानों के कर्ज माफ किए जाने की विशेष योजना जल्द लागू की जाए।

मायावती ने जिले के वर्तमान हालात के लिए खुद को नहीं बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि बसपा के पहले की सरकारों की उपेक्षा के कारण किसानों तथा क्षेत्र का विकास नहीं हो सका। इसका खामियाजा आर किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में मायावती ने अपने उस पत्र का भी उल्लेख किया जो उन्होंने 13 जनवरी 2008 में भेजा था। उस पत्र में मुख्यमंत्री ने बुन्देलखण्ड के हालातों का जिक्र किया था। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से जिले में सूखे की स्थिति हैं एसे में कर्ज में डूबे किसान ऋण किस प्रकार उतार सकते हैं।

मायावती ने जिले के लिए 2717 करोड़ रुपये के ऋण राहत पैकेज दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जब से सत्ता में आयी है तब से वह लगातार क्षेत्र के हालात सुधारने का प्रयास कर रही हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ होना बाकी है। कृषकों को राहत देने के लिए सरकार ने निर्देश दिए थे कि दो लाख रुपये तक का ऋण लेने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़क कार्यवाही न की जाए।

उन्होंने कहा कि जिले के हालात नजर डालें तो यह कहा जा सकता है कि किसानों को ऋण माफ किया जाना चाहिए क्योंकि वे इस हालत में नहीं है कि सरकारी ऋण वापस कर सकें। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए राज्य सकरार ने विशेष पैकेजों की मांग की लेकिन उनके अनुरोध के बाद भी केन्द्र कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गयी।

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