सीएमओ हत्‍यकांड का खुलासा, डिप्‍टी सीएमओ सहित 3 शूटर गिरफ्तार

Uttar Pradesh: Dpty CMO among 3 arrested in CMO murder case
लखनऊ। पिछले साल अक्टूबर और इस साल 2 अप्रैल को लगभग पांच महीने के अंतराल में परिवार कल्याण विभाग के दो सीएमओ की हत्या के पीछे विभाग के ही डिप्टी सीएमओ का हाथ था। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को दोनों हत्याकांड का राजफाश होने का दावा किया। खुद कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि एसटीएफ ने तीन हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया है। हत्यारों से पूछताछ में जानकारी मिली है कि सीएमओ की हत्या डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान ने कराई थी। सीएमओ परिवार कल्याण डॉ. विनोद आर्या की हत्या का सूत्रधार भी डॉ. सचान ही था। सीएमओ परिवार कल्याण डॉ. विनोद आर्या की हत्या के बाद करीब साढ़े चार माह तक डॉ. वाईएस सचान प्रभारी रहे।

इस बीच उन्होंने दवाइयों की खरीद-फरोख्त, किराये पर वाहन लेने, संविदा पर की गई नियुक्तियों और अंधता निवारण कार्यक्रम में जितनी अनियमितताएं की, उसकी डॉ. बीपी सिंह ने छानबीन शुरू कर दी। जब डॉ. बीपी सिंह ने सीएमओ परिवार कल्याण का कार्यभार संभाला तो उसने हिसाब-किताब न देने पर डॉ. सचान के खिलाफ मामला दर्ज कराने की चेतावनी दी थी। कैबिनेट सचिव के मुताबिक भारी वित्तीय अनियमितता करने वाले सचान ने बीपी सिंह को रास्ते से हटाने के लिए आनंद तिवारी के साथ 7 लाख रुपये में सौदा किया।

50 हजार रुपये एडवांस दिए। सचान बाकी भुगतान करते इसके पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए। इसके पूर्व डॉ. सचान ने डॉ. आर्या की हत्या के लिए आनंद तिवारी को 5 लाख रुपये दिया था। दोनों हत्याओं में रामकृष्ण वर्मा हत्यारों और डॉ. सचान के बीच माध्यम रहे। शुक्रवार को स्पेशल टास्क फोर्स ने सीतापुर के महौली थाना क्षेत्र के कुंवरपुर लच्छा के मूल निवासी रामकृष्ण वर्मा, गोंडा के छपिया थाना क्षेत्र के करनपुर के आनंद तिवारी उर्फ शैलेन्द्र तिवारी और विनोद शर्मा को लखनऊ के मडि़यांव थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। आनंद तिवारी और रामकृष्ण वर्मा का राजधानी में भी आवास है।

इनके पास से .32 बोर की पिस्टल, 315 का तमंचा, छह जीवित कारतूस, तीन बाइक व एक लग्जरी कार बरामद हुई है। पूछताछ में तीनों अभियुक्तों ने एसटीएफ को डॉ. बीपी सिंह और डॉ. आर्या की हत्या में अपनी संलिप्तता बताई। हत्या में मुख्य भूमिका आनंद तिवारी ने निभाई, जबकि विनोद शर्मा उसका सहयोगी रहा। डॉ. सचान से उनके पुराने संबंधी रामकृष्ण वर्मा ने आनंद तिवारी की मुलाकात करवाई। सचान ने अपनी राह के रोड़े मिटाने के लिए नकदी देने के साथ ही संविदा पर नौकरी देने का भी भरोसा दिया। इस अभियान में आनंद तिवारी ने विनोद शर्मा को भी शामिल कर लिया। बस्ती जिले में 2009 में बलात्कार के एक मामले में जेल काटने के बाद विनोद शर्मा पुलिस के भय से आनंद की सरपरस्ती में रहने लगा था।

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