निगमानंद को दी गई भू-समाधि, परिवार शामिल नहीं हुआ

इससे पहले डॉक्टरों ने शव का एक बार फिर पोस्टमॉर्टम किया और विसरा निकाल लिया। विसरा प्राप्त करने के बाद शव आश्रम को सौंप दिया गया, जिसके बाद संतों ने निगमानंद का अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार के पहले अखाड़ा परिषद व अन्य संगठनों से राय मश्विरा करने के बाद परिवार को एक चिठ्ठी दी गई, जिसमें लिखा गया कि सन्यासी होने की वजह से निगमानंद का शव परिवार को नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि आश्रम ने दोपहर दो बजे समाधी दिये जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उस दौरान डॉक्टर पहुंच गये और दोबारा पोस्टमॉर्टम पर दबाव बनाने लगे। पोस्टमॉर्टम में विसरा ले लिया गया और शव संतों को सौंप दिया गया, जिसके बाद निगमानंद को शाम करीब साढ़े पांच बजे भू-समाधी दे दी गई।
आपको बता दें कि आश्रम वालों से बात करने के बाद डीएम ने कहा था कि कानून रूप से निगमानंद को समाधि दी जायेगी क्योंकि उन्होंने लिखित रूप से अपने गृहस्थ जीवन से संन्यास लिया था। इसलिए कानूनन वो संत हुए और जिन्हें आश्रम और संविधान के अनुरूप समाधि मिलनी चाहिए लेकिन एक मानवीय संवेदना के तहत उनके परिवार वाले उनके अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते है लेकिन आश्रम वाले इस बात पर तैयार है कि नहीं इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।
आपको बता दें कि स्वामी निगमानंद के पिता प्रकाश झा ने आश्रम के ऊपर उनके बेटे का शव उन्हें ना देने का आरोप लगाया है जबकि मातृसदन के स्वामी शिवानंद का कहना है कि किसी भी स्वामी का गृहस्थ आश्रम से कोई लेना-देना नहीं रहता है, इसलिए स्वामी निंगमानंद के साथ वो ही हो रहा है जो एक संन्यासी के साथ होता है। उन्हें आश्रम के नियम के अनुसार समाधि दी जायेगी।
गौरतलब है कि स्वामी निंगमानंद के पिता प्रकाश झा ने स्वामी शिवानंद पर अपने बेटे को बहका कर अनशन करवाने और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। परिवार वाले निंगमानंद के शव की मांग कर रहे हैं, इसलिए वो मातृसदन आश्रम के सामने धरने पर बैठे हुए है। जबकि आश्रम आज दिन में निगमानंद के शव को समाधी देने जा रहा है।












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