जे डे को पहले ही हो चुका था हत्या का आभास, पत्नी से की थी चर्चा

पुलिस इस बिन्दू पर भी छानबीन कर रही है और पुलिस मुंबई के बाहरी इलाकों में हत्या से जुड़े तार तलाशने की कोशिश भी कर रही है। मगर आईए हम आपको अपराध संवाददाताओं के बारे में कुछ बात बता दें। अपराध की खबरों पर काम करने वाले संवाददाताओं को अक्सर पुलिस और अपराधियों की दोधारी तलवार पर चलना पड़ता है। ऐसे में जिंदगी के साथ हमेशा सब कुछ ठीकठाक ही रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। शायद ऐसा ही कुछ पूर्वाभास जे डे को भी पिछले कुछ समय से होने लगा था।
मुंबई के वरिष्ठ पत्रकारों से जब बात की गई तो पता चला कि जे डे को अक्सर ऐसा लगता था कि अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक व्यक्ति से बातचीत करते हुए उसके साथ-साथ कोई उन्हें भी न गोलियों से छलनी कर दे। जे डे की पैठ देश के दो प्रमुख अंडरवर्ल्ड समूहों दाऊद एवं छोटा राजन के यहां समान रूप से थी। उनके अनुसार वह कभी-कभी खोजी खबरें निकालने छोटा राजन एक सहयोगी के घर जाया करते थे।
मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश तिवारी ने जे डे के साथ अपनी मुलाकात के बारे में लिखा है कि वह सामान्यत: अपने कार्यो की चर्चा अपने परिवार से नही करते थे मगर मन में आ चुकी हत्या की डर की चर्चा उन्होंने अपनी पत्नी से भी की थी। फिर दोनों इसे मन का भ्रम समझकर हंसते रहे। यह बात और है कि वह सरगना कुछ दिनों बाद उसी बेडरूम में अपने विरोधियों की गोली का शिकार हो गया था, और शनिवार जे डे की जीवनलीला भी गोलियों से ही समाप्त हुई, भले ही घटनास्थल बदल गया था।
पत्रकारों ने मुंबई पुलिस को आड़े हाथों लिया
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में वरिष्ठ पत्रकार ज्योति डे (जे डे) की हत्या पर पत्रकार संगठनों ने आरोप लगाया कि पुलिस और अंडरवर्ल्ड के बीच साठगांठ इस हत्या की वजह हो सकती है। मुंबई मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रसाद मोकाशी ने कहा कि हम ज्योति डे की हत्या की निंदा करते हैं। उन्होंने पुलिस और अंडरवर्ल्ड की साठगांठ को बेनकाब करने का प्रयास किया और आज उन्हीं खुलासों के वह शिकार हो गए। मुंबई पुलिस और अंडरवर्ल्ड से चल रहा है और यहां कानून व्यवस्था नहीं है। हम पुलिस आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हैं क्योंकि वह शहर में अपराध दर काबू में नहीं ला सके।
टेलीविजन पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशिकांत संधबोर ने कहा कि ज्योति डे की हत्या से यह साबित हो गया है कि शहर में की पुलिस और अंडरवर्ल्ड में साठगांठ है। उन्होंने दाऊद इब्राहीम, छोटा राजन और अन्य पर कई खबरें की थी। हम मांग करते हैं कि गृहमंत्रालय इसकी गहन जांच कराए। इसके साथ ही उसे अतीत के उन मामलों पर एक रिपोर्ट सामने लानी चाहिए कि जिनमें पत्रकारों पर हमले हुए और उनकी जांच की स्थिति क्या है।
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