बाबा रामदेव के चलते कांग्रेस 'संदेश' का सर्कुलेशन रूका
गौरतलब है कि बाबा रामदेव के उज्जैन से दिल्ली पहुंचने पर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी समेत तीन अन्य मंत्री मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल और पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय के एयरपोर्ट जाने को लेकर पार्टी में पहले से ही मतभेद थे पर कांग्रेस के मुखपत्र कांग्रेस संदेश के ताजा अंक में अनिल शास्त्री ने संपादकीय लिखकर इस विवाद को एक बार फिर हवा दे दी है।
अनिल शास्त्री ने संपादकीय में सवाल उठाए हैं कि 'क्या यह जरूरी था कि चार मंत्री एयरपोर्ट जाते? नागरिक समाज की जायज मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाना सरकार का दायित्व है, लेकिन यह गरिमापूर्ण तरीके से होना चाहिए और अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।' भ्रष्टाचार पर भी इस अंक में कठोर कार्रवाई करने के विचार व्यक्त किए गए हैं। राजनीतिक हलकों में इसे केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन से जोड़ कर देखा जा रहा है। वैसे इसके संपादक अनिल शास्त्री ने पहले इस बाबत नाराजगी जता कर यह कह दिया था कि अगर इंदिरा और राजीव होते तो ऐसा कतई नहीं होने देते।
उल्लेखनीय है कि रामदेव प्रकरण में दिग्विजय सिंह द्वारा प्रणब के एअरपोर्ट पर जाने को लेकर खुले तौर पर ऐतराज जताने के बाद संदेश में जताई गई आपत्ति को बेहद गंभीर माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इससे सरकार और पार्टी के बीच मतभेद की अटकलें और पुख्ता हो गई हैं। कांग्रेस में पहले दिन से ही रामदेव मसले पर सरकार की रणनीति को लेकर असंतोष साफ था।
लेकिन वरिष्ठ मंत्रियों के रणनीति में शामिल होने और खुद प्रधानमंत्री कार्यालय के चलते मामले को सार्वजनिक रूप से तूल देने से पार्टी नेता बच रहे थे। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी इस मसले पर प्रणब मुखर्जी से मिलकर अपना ऐतराज जताया था। संदेश के ताजा अंक में पार्टी का मत स्पष्ट होने के बाद इस मामले को लेकर खेमेबंदी बढ़ने की कयास लगाए जा रहे हैं।













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