महिलाएं जो अपराध में एक कदम आगे

सुचेता कृपलानी और मायावती के रूप में दो-दो महिला मुख्यमंत्री देने वाले राज्य में कई महिलाएं हाई-प्रोफाइल अपराधों में फंसकर जेल में सजा काट रहीं हैं। कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में पूर्व मंत्री व बसपा विधायक अमरमणि की पत्नी मधुमणि हो या फिर इंजीनियर मनोज गुप्ता हत्याकाण्ड में फंसी विभा तिवारी। श्रीमती तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने पीडब्लूडी इंजीनियर की हत्या के मामले में अपने पति बसपा विधायक शेखर तिवारी का साथ दिया तथा हत्या के सबूत मिटाने की कोशिश की।
छात्रा शशि गौतम की हत्या कर साक्ष्य मिटाने तथा शव गायब करने के आरोप में दंडित की गयी सीमा आजाद का नाम भी आज सभी की जुबान पर है। सीमा आजाद फैजाबाद जेल में उम्रकैद की सजा काट रही हैं।
मेरठ नगर निगम में मेयर का चुनाव लडऩे वाली एक दबंग महिला हत्या व कई संगीन आरोपों में जेल काट रही है। भाजपा के कद्दावर नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड में सीबीआई ने पार्टी की ही एक महिला नेता को आरोपित किया था। हालांकि मामला अधिक आगे नहीं बढ़ सका लेकिन सभी को महिला का नाम व उसकी दबंगई का अहसास अवश्य हो गया।
महिलाओं के अपराध की दासतां जब भी शुरू होती है तो चंबल की दस्यु सुन्दरी फूलन देवी का नाम जरूर आता है। फर्क यह है कि उसने अपने ऊपर हुए अत्याचार का बदला लेने के लिए हथियार उठाए जबकि बाद में ढेरों महिलाओं ने इसे जीने का एक रास्ता बनाया। चंबल का इतिहास सिर्फ फूलन के नाम पर समाप्त नहीं हुआ। सीमा परिहार एक ऐसा नाम था जो चंबल के बीहड़ से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंच गया।
सीमा परिहार कुख्यात डकैत लालाराम और निर्भय गुर्जर का दाहिना हाथ कही जाती थी। सीमा के समान ही कुसमा नाइन ने भी अपराध की दुनिया में खूब नाम कमाया। कुसमा ने डकैती, हत्या व कई अन्य जघन्य अपराध किए। मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश के बीहडों में आतंक का पर्याय रहे पांच लाख रुपये की इनामी डकैत निर्भय गुर्जर की साथी सरला जाटव तथा नीलम गुप्ता आज भी जेल में हैं। दोनों ही निर्भय गुर्जर के अपराधों में बराबर की सहयोगी मानी जाती हैं। महिलाओं की अपराध में दखल इन नामों के साथ खत्म नहीं बल्कि बढ़ी है। महिला अपराधियों की सूची इतनी बढ़ी है कि अब पुलिस भी उन्हें पढऩे की हि मत नहीं जुटाती।












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