सिरसा में 'शिमला', बस बर्फ की कमी

Dera Sachcha Sauda garden
पिस्ते के पीले पीले फूलों की खुबसूरती आंखों को अपनी ओर खींच रही है, सेब की डालियां फलों से लद कर झुक गई हैं। अपने हरे हरे पत्तों की बीच बादाम को छुपाये बूटे की शान देखते ही बनती है। बब्बू गोसे और आलू बुखारे के पौधों में मानों सबसे ज्यादा फलदार कौन बनने की होड़ लगी है, जहां एक ओर बब्बूगोसे की हर नाजुक डाल पर फलों के गुच्छे मुस्कुरा रहे हैं वहीं दूसरी ओर आलू बुखारे खुशी के मारे लाल हुए जा रहे हैं।

अखरोट के पेड़ की लंबाई हर दिन नई उंचाई को छू रही है तो शरीफे का तना आसमान छूने को बेताब दिख रहा है। इन सब के बीच चाय पत्ती चुपके-चुपके अपने पौधों की कतार का दायरा बढ़ा रही है तो दूसरी ओर लौंग के फूल कभी भी फल बन सकने के तैयारी में हैं, जबकि रामफल के पेड से जल्द ही फूलों की महक बिखरने वाली है, यह सिरसा की ही बात हो रही है। जहाँ गर्मियों में पारा अक्सर पचास के आस पास पहुँच जाता है। तन को झुलसा देने वाली गर्म हवाये चलती है। गला सूख जाता है आदमी का जान बचाना भी जिस तपिश में मुहाल हो जाता है, जी हां उसी मरूभूमि में लहलहा रहे हैं बर्फ से घिरे पहाडों में पाये जाने वालें अखरोट बादाम पिश्ता सेब शरीफा लौकाट आलू बुखारे और चाय पत्ती के पेड पौधे।

आप यकीन करे या न करे पर मैने तो अपनी आंखों से देखा है डेरा सच्चा सौदा के आंगन में फल फूल से लदे इन पहाडी पौधों की कतार को। इतना ही नहीं यहां सेब के पौधों की तो सेवादारों ने नर्सरी बना ली है जिन्हे देख कर लगता है जल्द ही बाजार में सिरसा के सेबों की नई किस्म आने वाली है। चाय पत्ती के बाग अक्सर ढलानों पर होते हैं पर यहां तो खेतो में ही चाय पत्ती के पौधे तैयार हो गये है।

जब इन पौधों की परवरिश करने वाले सेवादार से सवाल किया गया कि यह सब कैसे सम्भव हुआ तो जवाब था, कि जब 1997 में उसे यहां की सेवा मिली तो दूर दूर तक उडती रेत की हवाओं के बीच सूरज की झुलसा देने वाली गर्मी जिसमें बाहर निकलना भी बहुत मुश्किल था। आज जहां बर्फीले पौधो की कतार है वहां कभी एक भी पौधा नही था। हम सेवादारों ने छायादार पेड लगाये पर वो गर्मी न सह सके।

कई बार कोशिश की पर अधिक गर्मी के कारण पौधे चले ही नही। हमने गुलाब के पौधे भी खूब लगाये पर सारी मेहनत बेकार हो रही थी। फिर हमने गुरू जी से स्थिति बताई और निवेदन किया की आप ही कुछ राह निकालें तब से यहां का नजारा ही बदल गया।

अब देखने वाले दांतो तले उंगलियां दबाते है जब उन्हें हम सेब, अखरोट, पिस्ता, शरीफा जैसे पौधों को दिखाते है। यह जो भी करिश्मा है सब गुरू की रहमत की बख्शीस है। ये तो बस अपने संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा के वचनों का कमाल है। किस पौधे को कितना पानी कितनी खाद देनी है। वह जैसा कहते हैं हम वैसा ही कर देते हैं.बाकी वो जाने और उनका काम। हमें तो बस इतना ही मालूम है कि गुरू जी दूर दूराज के ठंडे इलाकों से पौधो को मंगवाते हैं और हमें बुलाकर समझा देते है कि किस पौधे को कैसे लगाना है और किन किन बातों का ध्यान रखना है, हम तो सेवादार हैं वो खेवनहार है जिस पौधें को भी छू देते हैं वह फलों से लद जाता है, साहब वरना सिरसा में सेब उगाना हथेली पर सरसों उगाने जैसी बात है।

बातों बातों में उन्होने यह भी बताया कि यहां आम और केले के भी पेड है जिनमें मौसम के अनुसार खूब फल लगते हैं। लीची और कपूर के पौधे भी यहां अपनी जड़ें जमा चुके है। अंगूर, कीनू, बेर, अमरूद, आंवला के बड़े बड़े बाग तो पहले से ही डेरा की पहचान है जहां के फल देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी मिठास और स्वाद के दम पर अलग पहचान रखते है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+