ये है बसपा विधायक शेखर तिवारी की दरिंदगी

चलिये एक नज़र डालते हैं, उस दिन पर जब इस पापी विधायक ने अपने गुर्गों के साथ इस हत्याकांड को अंजाम दिया। 24 दिसंबर 2008 को शेखर तिवारी अपने 11 साथियों के साथ इंजीनियर के घर पर पहुंचे और देखते ही उन्हें पीटना शुरू कर दिया। अपने पति की हत्या की प्रत्यक्षदर्शी बनीं इंजीनियर की पत्नी शशि गुप्ता के मुताबिक हत्यारों ने मनोज गुप्ता को पहले जमकर पीटा। फिर नंगा तार लगाकर उन्हें बिजली का करंट लगाया। करंट के झटकों से तड़पते हुए इंजीनियर की मौके पर ही मौत हो गई।
इस कांड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भी मुकदमा दर्ज करने को तैयार नहीं थी। मीडिया द्वारा दबाव बनाये जाने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। यह मुकदमा इंजीनियर की पत्नी ने दर्ज कराया। मामला कोर्ट में गया और काफी जद्दोजहद के बाद दर्ज हुए मुकदमें में पुलिस ने ढिलाई बरती और कार्रवाई करने से बचती रही। इंजीनियर की पत्नी के आरोप व न्यायालय में लगायी गयी गुहार के बाद प्रशासन सख्त हुआ जब जाकर पुलिस ने विधायक शेखर तिवारी व उनकी पत्नी व जिला पंचायत अध्यक्ष विभा तिवारी, विनय तिवारी, रामबाबू, योगेन्द्र दोहरे, मनोज अवस्थी, देवेन्द्र राजपूत, संतोष तिवारी, गजराज सिंह, पाल सिंह व डिबियापुर थाने के इंसपेक्टर को आरोपी बनाया गया।
जांच पड़ताल व आला अधिकारियों के निर्देशों के बाद विभा तिवारी को छोड़ सभी को जेल जाना पड़ा। विधायक ने शासन प्रशासन की मद्द से कई बार प्रयास किया कि मामला शांत हो जाए लेकिन वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकें आखिरकार ढाई वर्ष के लम्बे इंतजार के बाद शुक्रवार को विशेष कोर्ट ने सभी आरोपियों को हत्या व साक्ष्यों को छिपाने का दोषी मानते हुए सजा सुना दी। सजा पाने वालों में विधायक शेखर तिवारी को आजीवन कारावास तथा उनकी पत्नी विभा तिवारी को ढाई वर्ष की कैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी गयी जबकि शेष आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनायी गयी। न्यायालय के फैसले ने बाद पीडि़त परिवार के आंसू पोछने का कार्य किया।
आरोपी विधायक शेखर तिवारी लम्बे समय से जेल में बंद चल रहे हैं। गत 12 अप्रैल को मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 15 अप्रैल निर्णय देने वाली थी, लेकिन अभियुक्तों द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करने के कारण फैसला टाल दिया गया है। आखिरकार शुक्रवार को न्याय की घड़ी आ गई और कोर्ट ने शेखर तिवारी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी।












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