सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अहलूवालिया की क्लास

Montek Singh Ahluwalia
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को योजना आयोग को आड़े हाथों लिया और उसके उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से यह समझाने को कहा कि गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन कर रहे लोगों का प्रतिशत 36 कैसे तय किया गया और 1991 से ही उनकी खरीददारी क्षमता अपरिवर्तित कैसे बनी हुई है।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने अहलूवालिया से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर योजना आयोग की स्थिति स्पष्ट करते हुए एक हलफनामा दाखिल करें। न्यायालय ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों सहित कई राज्यों ने 36 प्रतिशत के आंकड़े पर आपत्ति जताई है और कहा है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या बहुत अधिक है।

न्यायालय ने कहा, "आप (भारत) एक सशक्त अर्थव्यवस्था हैं। फिर भी देश के कई हिस्सों में भूख से मौतें हो रही हैं। हमारे दृष्टिकोण में कैसा गहरा विरोधाभास है। यहां दो भारत कैसे हो सकता है?" न्यायालय ने ये तर्क पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल)की ओर से दायर एक याचिका पर दिए हैं। पीयूसीएल ने कहा है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को पर्याप्त अनाज दिया जा रहा है। पीयूसीएल ने योजना आयोग के बीपीएल परिवारों के आंकड़े को भी चुनौती दी है।

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