राजनैतिक खेल की बिसात बन गई है अरुणिमा की लाचारी

सोमवार को जो अचानक राजनैतिक गलियारे से अरुणिमा के लिये जो रुझान निकला उसने सारी तस्वीर साफ कर दी। उत्तर पद्रेश सरकार अब अरुणिमा सिन्हा के मामले को लेकर केंद्र के सामने खड़ी हो गई है। दोनों सरकारों ने एक दूसरे पर शब्दों का प्रहार शुरु कर दिया है। केंद्र सरकार का कहना है कि अपने ही राज्य के अर्न्तराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के साथ इतने दर्दनाक हादसे के बाद भी प्रदेश का खामोश रवैया बेहद चिंताजनक है।
उत्तर प्रदेश की सरकार ने हादसे के दो दिन बाद सिर्फ एक लाख रुपये मदद के रूप में देने की घोषणा की थी जबकि केंद्र सरकार ने दो लाख रुपये और सरकारी नौकरी देने की घोषणा घटना वाले दिन ही कर चुकी थी। सोमवार को केंद्रिय खेल मंत्री अजय माकन ने लखनऊ आकर सोनू की हालचाल जानने का फैसला लिया। बस यही से शुरु हो गई शह और मात की कहानी। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि घटना को एक हफ्ता हो गया है और प्रदेश सरकार के एक छोटे से नुमाइंदे को अरुणिमा को अस्पताल जाकर देखने की फुर्सत नहीं है। उधर केंद्रीय मंत्री अपने सारे पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को निरस्त कर लखनऊ पहुंच रहे हैं। बस फिर क्या था।
राज्य सरकार भी रजनैतिक दांव पेंच समझकर फौरन सक्रिय हो गई। माकन के आने से पहले मुख्यमंत्री मायावती ने अपने खेल मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल को सरकारी नौकरी के ऑफर के साथ सोनू को देखने अस्पताल भेज दिया। अयोध्या प्रसाद पाल अस्पताल पहुंचे और नम्बर बढ़ाने के लिसे मीडिया के सामने खेल विभाग में अरुणिमा को नौकरी देने का ऐलान कर दिया।
इसके बाद माकन पहुंचे उन्होंनें अरुणिमा का हालचाल लिया और चले गये। माकन के आने के बाद प्रदेश सरकार को कांग्रेस खेमे से यह इशारा मिल गया कि बेहतर इलाज के लिए सोनू को दिल्ली ले जाया जाएगा। बस क्या था प्रदेश मुखिया ने नहले पर दहला मारा और अरुणिमा को इलाज के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय कर दिया और वह भी राजकीय विमान से।












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