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नोएडा। जीने की तम्‍मना दो वर्ष पूर्व ही त्‍याग चुकीं थी दोनों बहनें

Uttar Pradesh
नोएडा। सात माह बाद अपनी ही कैद से आजाद हुई दो बहनों में से बड़ी बहन अनुराधा की आज सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। छोटी बहन सोनाली की भी हालत नाजुक बताई जा रही है। मालूम हो कि मंगलवार को दोनों बहनों को नोएडा सेक्‍टर 29 स्थित उनके मकान से समाजिक संगठनों ने पुलिस की मदद से बाहर निकाला था और उन्‍हें इलाज के लिये कैलाश हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। दोनों बहने पिछले सात माह‍ से अपने कमरे में कैद थी और जिंदा कंकाल की तरह हो चुकी थी। इस अजीबो गरीब घटना की चर्चा अभी चल ही रही थी कि घर से बरामद सोनाली की डायरी ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया। बरामद उस डायरी ने इतने सवाल पैदा कर दिये हैं कि अगर सोनाली भी नहीं बची तो इसका जबाब ढूंढना मुश्किल हो जायेगा।

पिता और मां की मौत से लेकर अपने कुत्‍ते की मौत और फिर कमरे में खुद को कैद करने की सारी कहानी सोनाली की डायरी बंया कर रही है। खुद के घर को नर्क में तब्दील करने वाली दोनों बहनें आखिर क्या सोचती थीं, आखिर क्यों उन्होंने अपने आशियाने को मौत की कोठरी में तब्दील कर लिया था. किस चीज से दोनों बहनें डरती थीं. आखिर उनके डिप्रेशन का कारण क्या थी? कमरे से बरामद सोनाली की डायरी सभी सवालों के जबाब देने में सक्षम हैं। सोनाली ने अपनी डायरी में अपने दिल का हाल लिखा है। अपनी डायरी के पहले पन्ने पर सोनाली ने लिखा है... माई एंड, ओनली अनुराधा एंड विपिन और नो फोन कॉल्‍स । डायरी पर यह लिखावट वर्ष 2009 की है। इस बात से साफ है कि सोनाली को अपना अंत नजर आने लगा था और उसमें जीन की उम्‍मीद नहीं बची थी।

उसकी जिंदगी में दो ही लोग थे अनुराधा और विपिन (भाई)। साथ ही अनुराधा ने लिखा है कि उसे कोई फोन नहीं करता था, वो अकेली रह गई थी। अपनी डायरी के दूसरे पन्ने में सोनाली ने जो चार शब्द लिखे हैं वो उसकी मनोदशा के साफ-साफ बयां करते हैं। सोनाली को कुछ अनजाने नंबर से कॉल्स आ रहे थे। सोनाली अपनी जिंदगी से खुश नहीं थी। इतना ही नहीं, सोनाली के अंदर हीन भावना थी। जिसके बारे में उसने अपनी डायरी में लिखा है. सबसे महत्वपूर्ण बात उसने ब्‍लैक मैजिक लिखा है। जी हां, सोनाली काले जादू से डरती थी। उसे लगता था कि उसके रिश्तेदारों ने दोनों बहनों पर काला जादू कर दिया है। फिलहाल इस मामले में सामाजिक संगठनों ने गहनता से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बरामद डायरी से उठने वाले एक-एक सवाल की जांच हो और उसके तह तक जाकर मामले में कार्रवाई की जाए।

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