63 साल बाद देश को दोबारा मिली आजादी

सख्त लोकपाल विधेयक बनाने के लिए सरकारी अधिसूचना जारी किए जाने के बाद अनशन तोड़ते हुए गांधीवादी नेता और समाज सुधारक अन्ना हजारे ने सरकार से साफ कह दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू उनका जनआंदोलन आजादी की दूसरी लड़ाई है और यह जारी रहेगी। लोकपाल विधेयक पारित कराना इस लड़ाई का पहला चरण है। यदि जरूरत पड़ेगी तो हम फिर विरोध करेंगे।
पिछले पांच दिनों से अनशन कर रहे अपने 400 साथियों का अनशन तुड़वाने के बाद स्वयं एक बच्ची के हाथों नींबू पानी ग्रहण करके अन्ना हजारे ने अपना अनशन तोड़ा। इसके बाद उन्होंने कहा, "सभी जाति, धर्म और प्रांत के लोगों ने एकजुट होकर इस आंदोलन में दुनिया को अपनी एकता दिखाई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि युवाओं ने आगे आकर नई उम्मीद जगाई है। साथ ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया ने देशहित के लिए अपनी ताकत दिखाई है।"
अन्ना हजारे ने कहा, "युवा शक्ति राष्ट्रशक्ति है और लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए अभी लम्बी लड़ाई बाकी है जिसमें युवाओं को संघर्ष के हर चरण में आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि पहले लोकपाल विधेयक का मसौदा बनाना चुनौती है और फिर इसे मंत्रिमंडल से पारित करवाना है। इसके बाद संसद में इसे पारित करवाना है। यदि किसी भी स्तर पर अड़ंगा लगाने की कोशिश की गई तो हम फिर आंदोलन करेंगे।"
अन्ना हजारे ने कहा कि यदि 15 अगस्त तक लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ तो वह दोबारा आंदोलन करेंगे। अन्ना ने कहा कि वह इस आंदोलन के दौरान देश भर में विभिन्न प्रदेशों में अनशन करने वाले लोगों से वह मुलाकात करेंगे और सबसे सम्पर्क स्थापित करते हुए एक संगठन की नींव रखेंगे। आजादी की लड़ाई के समय भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू जैसे देशभक्तों ने इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाकर जहां गोरे अंग्रेजों के नींद उड़ाई थी वहीं दूसरी आजादी के इस आंदोलन में नौजवानों ने यह नारे लगाकर 'काले अंग्रेजों' की नींद उड़ाई है।












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