झुक गई सरकार, अन्ना हजारे ने तोड़ा अनशन

झुक गई सरकार, अन्ना दस बजे तोड़ेंगे अनशन
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे वरिष्ठ गांधीवादी अन्ना हज़ारे और केंद्र सरकार के बीच जारी गतिरोध शुक्रवार रात ख़त्म हो गया है. इसके बाद अन्ना ने घोषणा की कि वे शनिवार सुबह अपना अनशन समाप्त कर देंगे. हालांकि उनका कहना था कि सरकार के आदेश की कॉपी देखने के बाद ही वे ऐसा करेंगे.

इस घोषणा के बाद अन्ना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं और मैं अपना अनशन सुबह साढ़े दस बजे तोड़ूँगा. ये पूरे राष्ट्र की जीत है."" अनशन तोड़ने की ख़बर के मिलते ही जंतर-मंतर में जमा लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई. अन्ना हज़ारे ने मंगलवार को आमरण अनशन पर जाने की घोषणा की थी.

समझौते के अनुसार नए लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार 10 सदस्यीय संयुक्त समिति बनाएगी. इसमें पांच लोग नागरिक समाज के प्रतिनिधि होंगे और पांच लोग सरकार की तरफ़ से होंगे. चेयरमैन का पद सरकार के पास रहेगा तो वाइस चेयरमैन नागरिक समाज का होगा. वित्त मंत्री और केंद्र सरकार के संकटमोचक प्रणब मुखर्जी इस संयुक्त समिति के अध्यक्ष होगें.

सरकार की तरफ़ से दूसरे सदस्यों में मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली, गृह मंत्री पी चिदंबरम और जल संसाधन मंत्री सलमान ख़ुर्शीद शामिल हैं. आंदोलनकारियों की तरफ़ से ख़ुद अन्ना हज़ारे के अलावा अरविंद केजरीवाल, कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री शांति भूषण शामिल होंगे.शांति भूषण संयुक्त समिति के सह अध्यक्ष भी होगें.

जल्द है संयुक्त समिति की बैठक होगी और उम्मीद है कि सरकार संसद के मॉनसून सत्र में इस बिल को संसद में पेश करेगी. इस समझौते में सरकार की ओर से सबसे अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये भारत के लोकतंत्र की ताक़त को दर्शाता है. सिब्बल ने कहा, '' मुद्दा ये नहीं है कि किसकी जीत और किसकी हार हुई है. इससे पता चलता है कि भ्रष्टाचार की लड़ाई में पूरा देश एक साथ हैं''.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जमकर तारीफ़ करते हुए सिब्बल ने कहा कि उन दोनों की उदारदिली की वजह से ये समझौता संभव हो पाया है. इस अभियान में अन्ना के क़रीबी सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री और शांति भूषण ने कहा कि लोकतंत्र में कितनी शक्ति होती है ये अन्ना हज़ारे और उनके समर्थकों ने साबित कर दिया है.

उन्होंने कहा,''77 के बाद से ये पहली इतनी बड़ी जीत है. अगर जनता अपनी शक्ति पहचान ले और शांतिपूर्ण तरीक़े से अपनी बात रखे तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा." इससे पहले इस नतीजे तक पहुंचने से पहले शुक्रवार दिन भर बैठकों और बातचीत का दौर चलता रहा. सुबह में दोनों पक्षों के बीच बातचीत नहीं हुई. दोपहर तक गतिरोध जारी रहा, लेकिन शाम होते होते ख़बरें आने लगीं कि सरकार आंदोलनकारियों की ज़्यादातर मांगें मानने को राज़ी हो गई.

शाम को कपिल सिब्बल के घर पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई.अन्ना हज़ारे की ओर से अरविंद केजरीवाल,किरण बेदी और स्वामी अग्निवेश बातचीत में शामिल हुए जबकि सरकार की ओर से कपिल सिब्बल,क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली और जल संसाधन मंत्री सलमान ख़ुर्शीद शामिल थे. कपिल सिब्बल के घर से बाहर निकलते हुए स्वामी अग्निवेश ने पत्रकारों से कहा कि कुछ ही देर में अन्ना हज़ारे जी कुछ घोषणा करने वाले हैं जिनसे सभी ख़ुश होंगे लेकिन वो घोषणा हुई पूरे दो घंटे के बाद रात में 10 बजे के आस पास.

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