लखनऊ: सीएमओ हत्याकांड के तार कहीं पूर्वांचल के बाहुबली से तो नहीं?

गौरतलब है कि डा. बीपी सिंह की हत्या भी ठीक उसी तरह की गई जैसे डा. विनोद आर्या की जान ली गई थी। डा. आर्या की हत्या पूर्वांचल के एक बाहुबली ने ठेके पर कराई थी। वारदात को अंजाम देने का ठेका नैनी जेल में बंद एक माफिया को सौंपा गया था और उसने इसे वाराणसी के भाड़े के हत्यारे को सौंपा था। उसने यह काम कराने के लिये पूर्वांचल के चार युवकों को पकड़ा और उन्हें 7 लाख रुपये देकर डा. आर्या की हत्या कराई। 27 अक्टूबर 2010 को बाइक से चारों युवक लखनऊ आए और विकासनगर में मार्निग वॉक कर घर लौट रहे डॉ. आर्या की हत्या कर मोटरसाइकिलों से उसी दिन वापस चले गए थे।
बाद में उनमें दो शूटर अवैध तमंचा रखने के जुर्म में बिहार में गिरफ्तार किए गए थे। दूसरी ओर लखनऊ पुलिस ने दो युवकों को शूटर बताकर डॉ. आर्या की हत्या करने के आरोप में जेल भेज दिया और हत्या कराने का ठीकरा माफिया अभय सिंह के सिर फोड़ा गया। जिन लोगों को शूटर बताकर जेल भेजा गया, वे कभी उसी बाहुबली के करीबी थे, जिसने डॉ. आर्या की हत्या कराई।
बाद में दोनों युवकों की बाहुबली से दूरियां हो गई थीं। बाहुबली ने अपने दोनों दुश्मनों को शूटर बताकर जेल भिजवाया और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के इशारे पर माफिया अभय को साजिशकर्ता करार दिया गया। कहा तो यह भी जा रहा है कि डॉ. बीपी सिंह की हत्या के पीछे उसी बाहुबली का हाथ है, जिसने डॉ. आर्या की जान ली। यह भी सुगबुगाहट है कि इस बार भी वही कांट्रैक्ट किलर और चार में से दो शूटर इस्तेमाल किए गए हैं।












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