सुषमा के सवाल पर मनमोहन का पलटवार कहा करो मेरा इंतजार...
सुषमा के तीखे प्रश्नों और आरोपों के बादल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि साल 2009 का चुनाव जीतने के बाद सरकार पर लगे आरोप समाप्त हो गए और वर्ष 2008 में पेश विश्वास प्रस्ताव में जीत हासिल करने के लिए उनकी सरकार 'अवैध कार्य' में संलिप्त नहीं थी, विपक्ष ने उन पर तीखे हमले किए।
वर्ष 2008 के नोट के बदले वोट मामले की जांच के लिए गठित संसदीय समिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि समिति ने अपने निष्कर्ष में कहा था कि सरकार को गिरने से बचाने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त की गई, इसे साबित करने के लिए 'साक्ष्य पर्याप्त नहीं' हैं।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा लोकसभा में बुधवार को लाए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोहराया कि न तो सरकार और न ही कांग्रेस की ओर से 2008 में विश्वास प्रस्ताव के दौरान सांसदों के वोट खरीदे गए। उन्होंने कहा, "कई सांसदों ने पहले भी आरोप लगाए हैं। विपक्ष की मांग पर मैंने 18 मार्च को भी सदन में बयान दिया था। मैं उसे एकबार फिर दोहराता हूं।"
प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज द्वारा किए गए शायराना कटाक्ष का जवाब भी शायराने अंदाज में दिया और साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर भी यह कहते हुए निशाना साधा कि उन्हें तो लगता है कि प्रधानमंत्री बनने का जन्मसिद्ध अधिकार सिर्फ उन्हीं का है।
नियम 193 के तहत लोकसभा में चली चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "ओजस्वी भाषण देने के मामले में मैं विपक्ष की नेता की बराबरी नहीं कर सकता लेकिन उन्होंने जिस अंदाज में मुझसे सवाल पूछे हैं उसका जवाब भी मैं उसी अंदाज में देना चाहूंगा।" प्रधानमंत्री ने मोहम्मद इकबाल की प्रसिद्ध शायरी पढ़ते हुए कहा, "माना कि तेरे दीदका काबिल नहीं हूं मैं, तू मेरा शौक तो देख, तू मेरा इंतजार देख।"













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