कांग्रेस पर इस बार ममता ने किया वार, छोड़ी सिर्फ 64 सीटें

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और रेल मंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कांग्रेस के साथ वहीं किया जो ठीक दो साल और एक दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने लोकसभा चुनाव के पहले किया था। लालू ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए तीन सीटें छोड़ी थी वहीं ममता ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के लिए सिर्फ 64 सीटें ही छोड़ी है।

पश्चिम बंगाल में वामपंथी किले को ध्वस्त करने के लिए कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच लम्बे समय से सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा चल रही थी लेकिन इससे पहले कि यह चर्चा परवान चढ़ पाती, ममता ने शुक्रवार को 228 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। उन्होंने कांग्रेस के लिए सिर्फ 64 सीटें छोड़ी हैं।

कांग्रेस ने ममता द्वारा की गई इस एकतरफा घोषणा पर कहा है कि वह इस बारे में जल्द ही फैसला करेगी कि छोड़ी गई 64 सीटों पर चुनाव लड़ती है या फिर सभी 294 सीटों पर। कांग्रेस राज्य में 90 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और इसी के अनुरूप उसने तृणमूल कांग्रेस से सीटें मांगी थी।

तृणमूल कांग्रेस ने अपने सहयोगी दल "सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट" (एसयूसीआई-सी) के लिए भी दो सीटें छोड़ी है। ममता ने कहा, "कांग्रेस के साथ गंठबंधन के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। गुरुवार रात हुई चर्चा के बाद हमने कांग्रेस के लिए 64 सीटें छोड़ी है। अगर कांग्रेस इसे स्वीकार करती है तो मुझे बेहद खुशी होगी।"

ममता की इस घोषणा को इस रूप में लिया गया कि कांग्रेस को यदि 64 सीटें स्वीकार है तो ठीक है और नहीं है तो तृणमूल अकेले दम चुनाव में उतरने को तैयार है। ममता ने कहा, "हमारे पास समय नहीं बचा है। चुनाव सम्बंधी कई प्रक्रियाएं अभी बाकी है।" राज्य में 18 अप्रैल से 10 मई तक होने वाले विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई थी। इस सिलसिले में ममता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के बीच हुई बातचीत के बावजूद अभी दुविधा बनी हुई थी कि इसी बीच ममता ने शुक्रवार देर शाम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी।

तृणमूल की इस एकतरफा घोषणा से कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। कांग्रेस ने कहा है कि वह विषय पर चर्चा करके जल्द ही कोई फैसला लेगी। बहरहाल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के स्वदेश लौटने के बाद ही कांग्रेस कोई फैसला लेगी। ज्ञात हो कि सोनिया लंदन में हैं जहां उनकी बीमार मां का इलाज चल रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2009 में तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस और एसयूसीएल-सी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ा था और राज्य में 1977 से सत्ता पर काबिज वाम मोर्चे को पछाड़ दिया था।

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