विकीलीक्स परमाणु धमाकों से दहली यूपीए ने बुलाई आपात मीटिंग

नई दिल्ली | पिछले सात सालों से देश में यूपीए सत्ता पर है। यूपीए के पहले कार्यकाल में किए गए कारनामे दूसरे कार्यकाल के लिए अब फांसी का फंदा बन गए हैं। साल 2008 में परमाणु संशोधन विधेयक को पारित करा कर यूपीए ने सदन में अपनी सफलता का झंडा गाड़ दिया था।

विकीलीक्स के हालिया खुलासे में सामने आया कि यूपीए ने अमेरिकी दबाव में आकर परमाणु विधेयक को पारित कराने के लिए प्रमुख विपक्षी दल भाजपा समेत रालोद के भी चार सांसदों को दस-दस करोड़ रुपये में खरीदा था। इस खुलासे के बाद से संसद में भूचाल आ गया है। भाजपा और वाम दल ने संप्रग सरकार के लिए संसद चलाना दूभर कर दिया है। अब कांग्रेस के नेता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी और चिदंबरम एक बार फिर से मीटिंग कर इस जिन्न को बोतल में बंद करने का जुगाड़ तलाश रहे हैं।

पूरे देश में हर ओर इसी बात पर चर्चा हो रही है कि सत्ता पर बैठे ईमानदार छवि वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मजबूत महिला माने जाने वाली सोनिया गांधी ने एक विधेयक के लिए अमेरिका के होथों देश बेच दिया। ऐसे में याद आता है कि जब पिछले सान नवंबर में विकीलीक्स अचानक पूरी दुनिया में छा गया था उस समय अमेरिका ने कई देशों को इसके लिए चेतावनी भेजी थी कि उन्हे दिक्कतों का सामना करने के लिए सावधानी रखनी चाहिए।

विकीलीक्स ने अमेरिका रक्षा विभाग के पेंटागन से गोपनीय दस्तावेज निकाल कर इंटरनेट पर पूरी दुनिया के सामने परोस दिए हैं। भले ही पूरी दुनिया के हुक्मरान विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे के पीछे पड़ गए हों लेकिन उसने पूरी दुनिया के दादा अमेरिका के खिलाफ एक ब्रम्हास्त्र का निर्माण कर दिया है। भारत की विदेश नीति साल दर साल अमेरिका की विदेश नीति का हिस्सा बनती जा रही है। विकीलीक्स खुलासों से ये सामने आ गया है कि अमेरिका की साम्राज्यवादी नीतियां लागू करने के लिए लोकतंत्र के नुमांइदे अपना ईमान बेचने के लिए तैयार खड़े हैं।

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